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दिल नहीं दिमाग का मामला है प्यार

अक्‍सर प्यार में दिल की बात बहुत की जाती है लेकिन किसी के प्यार में गहराई से डूबना दिल नहीं बल्कि दिमाग का खेल होता है। जी हां, एक ताजा अध्ययन में पाया गया है कि दिमाग का वह भाग जिससे प्रेरणा और प्रतिफल की भावना जुड़ी है, वही भाग प्यार में दीवानगी की हद तक ले जाने के लिए जिम्मेदार होता है।

स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्यार के मामले में दिल नहीं बल्कि दिमाग की हरकतें ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

एक छोटे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने प्यार में पागल 10 महिलाएं और 7 पुरुषों को शामिल किया। इनका रिलेशनशिप एक महीने से लेकर दो साल तक का था।

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को उनकी स्वीटहार्ट की फोटो दिखाई। इसमें प्रतिभागियों की मैगनेटिक रिजोनेंस इमेज पर विचार किया।

अध्ययन में देखा गया कि जब प्रतिभागियों ने अपने लवर की फोटो देखी तो उनके दिमाग का वह हिस्सा ज्यादा हरकत में आ गया जो कभी कोई इनाम मिलने या किसी प्रेरणादायी बातों को सुनने में हरकत में आता है।

प्रमुख शोधकर्ता आर्थर एरोन ने लाइवसाइंस को बताया कि प्यार में जुनूनी दीवानों का दिमाग ठीक उसी तरह से काम करता है जैसे किसी ड्रग एडिक्ट का दिमाग काम करता है।

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