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स्वामी का पाठ्यक्रम हटाने पर हार्वर्ड की सफाई

हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने कहा कि हर साल संकाय में बदलाव करना और उसके द्वारा संचालित ग्रीष्मकालीन स्कूल सत्रों में पाठ्यक्रम सूची पर मतदान कराया जाना उसके नियमों में शामिल है।

विश्वविद्यालय में जिन विषयों को जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी पढ़ाते थे उन्हें पाठ्यक्रम से हटाने के फैसले को लेकर आई खबरों के बाद संस्थान ने यह बात कही है। इसके पहले स्वामी ने टिप्पणी की थी कि पाठ्यक्रमों को हटाने से पहले हार्वर्ड को उनसे संपर्क करना चाहिए था।

हार्वर्ड के कला एवं विज्ञान संकाय ने स्वामी द्वारा पढ़ाए जाने वाले अर्थशास्त्र के दो पाठ्यक्रमों को हटाए जाने के लिए उनके एक भारतीय प्रकाशन के लिए भारत में इस्लामिक आतंकवाद पर लिखे एक विवादास्पद लेख का हवाला दिया और विश्वविद्यालय के ग्रीष्मकालीन स्कूल कार्यक्रम से इन विषयों को हटाने के बारे में मतदान कराया।

संकाय सदस्यों ने पाया कि शांति के नजरिए से स्वामी का लेख निंदनीय और हिंसा को भड़काने वाला है। संकाय ने मतदान में भारी बहुमत के साथ पाठ्यक्रमों को हटाने पर मुहर लगाई। इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए स्वामी ने नई दिल्ली में कहा कि उन्हें लगता है कि कोई भी फैसला लेने से पहले हार्वर्ड को उनकी राय जानने के लिए पत्र भेजना चाहिए था।

स्वामी की टिप्पणी पर कला एवं विज्ञान संकाय ने ईमेल के जरिए बताया कि हार्वर्ड के कला एवं विज्ञान संकाय के सदस्य हार्वर्ड ग्रीष्मकालीन स्कूल के पाठ्यक्रम में संशोधन या मंजूरी के लिए हर वर्ष मतदान करते हैं। हार्वर्ड ग्रीष्मकालीन स्कूल एक वार्षिक कार्यक्रम है जो जून से अगस्त तक चलाया जाता है।

हार्वर्ड से 1965 में पीएचडी करने वाले स्वामी सहायक एवं सह प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देते थे। वह सत्र में अर्थशास्त्र और व्यापार में परिमाणात्मक तरीके और भारत और पूर्वी एशिया में आर्थिक विकास विषय पढ़ाते थे। जुलाई में अपने आलेख में स्वामी ने सैकड़ों मस्जिदों को ढहाने की वकालत की और सुझाव दिया कि केवल उन्हीं मुस्लिमों को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए जो यह स्वीकार करें कि उनके पूर्वज हिंदू थे।

ग्रीष्मकालीन स्कूल के डीन डोनाल्ड फीस्टर ने कहा था कि सूची सहित पाठ्यक्रमों का चयन विभाग विशेष द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि विचार निदंनीय हैं लेकिन दूसरी ओर विभागों और उनके प्रस्ताव का समर्थन करना हमारा कर्तव्य है। स्वामी ने हार्वर्ड के फैसले को खतरनाक नियम बताते हुए कहा था कि इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय को पहले उनकी राय लेनी चाहिए थी, जो कि एक आम प्रक्रिया है लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

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