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कश्मीरी से अधिक झारखंडी होने पर है फक्र

मुझे कश्मीरी से अधिक झारखंडी और उसके बाद भारतीय होने पर फक्र है, अब इसी मिट्टी में हमारा सब कुछ है। 32 साल का नाता है। ऐसे ही थोड़े टूटेगा। हजारीबाग के पबरा रोड स्थित अब्दुल बारी कॉलोनी के कश्मीर हाउस में रहनेवाले फारूख अहमद मलिक की आवाज इतना कहते-कहते थोड़ी भर्रा जाती है।

वह अपने बेटे एहतेशाम और भांजे तौसीफ अहमद की गिरफ्तारी के बाद शनिवार को पहली बार हिन्दुस्तान से बातचीत कर रहे थे। इन दोनों को लश्कर का कथित आतंकी होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

मलिक कहते हैं : खुदा ही जानता है कि आंतकवाद, फिरकापरस्ती हमारे खून में नहीं है। यदि मेरे बेटे ने गुनाह किया है, तो उसे अवश्य कड़ी सजा मिले। मैं ऐसा वालिद हूं कि अपने बेटे की ओर झाकूंगा भी नहीं।

मलिक तनिक उत्तेजित हो जाते हैं : देश से गद्दारी करनेवालों के लिए देश में कोई जगह नही होनी चाहिए। लेकिन यदि किसी को फंसाया गया है, तो मैं कहना चाहूंगा कि किसी को भी केवल कश्मीरी होने की सजा मत दो।

उन्होंने कहा कि वह खुद अभी तहकीकात कर रहे हैं। यदि उन्हें बेटे के निर्दोष होने के प्रमाण मिले, तो अवश्य अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
बकौल मलिक, वह खुद आतंकवाद के सताए हैं। दो बेटे होने के कारण आंतकियों को उनका एक बेटा चाहिए था। इस कारण उसका अपहरण किया गया, फिर मुक्त। खुद उनका भी अपहरण फिरौती के लिए किया गया।

कई दफा वह और उनका परिवार आंतकी हमलों में बचे। परिवार के कई लोग मारे गए। यह सब देखकर उन्होंने अपनी ससुराल गिरिडीह के आसपास बसने को सोची। तब हजारीबाग आ गए।

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