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महिला सशक्तिकरण के लिए बदल ली पहचान

श्रीकांत तिवारी पर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में काम करने का जुनून सवार था। लेकिन मुश्किल यह थी कि आदिवासी महिलाएं उनसे खुल कर बात नहीं कर पाती थीं। अचानक श्रीकांत के मन में खयाल आया कि यदि वह खुद महिला बन जाएं, तो फिर यह मुश्किल हल हो सकती है। 

श्रीकांत ने अपने मित्रों से सलाह ली और पहुंच गए सीएमएसी वेल्लोर। वहां डॉ संतोष कुमार से अपने मन की बात बताई। डॉक्टरों ने पहले उनकी जांच की और फिर उनके लिंग परिवर्तन की चिकित्सा शुरू हुई।

करीब छह लाख रुपए खर्च करने और पांच साल के दौरान कई शल्य चिकित्सा से गुजरने के बाद अंतत: श्रीकांत को नया नाम मिला-श्वेता। अब श्वेता को देखने या बातचीत करने से तनिक भी आभास नहीं होता कि वह कभी पुरुष थीं।

डॉ. तिवारी ने श्वेता को एक वयस्क महिला होने का प्रमाण पत्र दे दिया है। अब श्वेता पूरी तन्मयता से गुमला जिले के नक्सल प्रभावित विशुनपुर इलाके में अपना अभियान चला रही हैं। श्वेता खुद को रांची की रहनेवाली बताती हैं।

लिंग परिवर्तन कराने में रांची के आनंद साहू और शंकर साहू की मदद को वह याद करती हैं। श्वेता को रांची के एक युवक ने शादी का प्रस्ताव भी दिया है। पिछले वेलेंटाइन डे के दिन दोनों मिले भी थे।

श्वेता कहती हैं कि उन्होंने समाज के दबे और कुचलों के लिए एक बड़ा मुहिम चलाने का बीड़ा उठाया है। वह चाहती हैं कि आदिवासी महिलाएं खुद शोषण की जंजीर तोड़ें और आर्थिक दृष्टि से अपने पैरों पर खड़ी हों।

श्वेता फर्राटेदार अंगरेजी बोलती हैं और उनकी पहचान पूरे इलाके में है। वह बताती हैं कि बचपन से ही वह पढ़ाई में तेज थीं।

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