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बेटा परमवीर चक्र विजेता, मां बदहाली से लाचार

जिस शहीद के नाम पर प्रदेश में चौक और प्रखंड हों उसका परिवार पांच एकड़ जमीन के लिए तरसे तो इसे क्या कहेंगे? घोर बदहाली में जीवन गुजार रहे परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का के परिवार के लिए यही सच है।

अलबर्ट एक्का की शहादत के 41 साल बाद भी इस परिवार को आवंटित पांच एकड़ भूमि पर कब्जा नहीं मिल सका। हालत यह है कि शहीद का पुत्र सरकार से चपरासी की नौकरी मांगने को मजबूर हो गया है।

एक्का का परिवार अपने पैतृक गांव जारी में रह रहा है। शहीद की विधवा बलमदीना एक्का करीब 75 वर्ष की हैं। अक्सर बीमार रहने वाली बलमदीना की सरकार से एक ही गुहार है कि उनके परिवार को जमीन पर कब्जा मिल जाए।

शहीद का पुत्र विन्सेंट एक्का पत्नी रजनी एक्का और दो पुत्र-पुत्रियों के साथ खेतीबारी करता है। सरकार ने गांव में ही बलमदीना के परिवार को जो पांच एकड़ जमीन दी उस पर बोधन सिंह नामक ग्रामीण का कब्जा है।

फिलहाल यह मामला न्यायालय में लंबित है। बिहार सरकार ने पटना के कंकड़बाग में परमवीर के आश्रितों को फ्लैट और रांची सैनिक बाजार में दुकान आवंटित किया था। लेकिन ये दोनों संपत्तियां भी इस परिवार के हाथ से निकल चुकी हैं।

सरकार हमें जमीन दिला दे हम किसी तरह कर लेंगे गुजर-बसर: बलमदीना
बलमदीना एक्का ने बताया कि सरकार ने उन्हें जो पांच एकड़ जमीन आवंटित की है उसपर हमारे परिवार का कब्जा दिलाया जाए। उसी से हमारा पूरा परिवार जीवन बसर कर लेगा। पेंशन जारी वाले बैंक से मिलने लगे तो गुमला तक दौड़भाग बंद हो जाए।। इस उम्र में पेंशन के लिए गुमला जाने में काफी परेशानी होती है।

शहीद का परिचय:
पूर्वी भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अलबर्ट एक्का 1971 के भारत-पाक युद्ध में गंगासागर की लड़ाई में अदम्य वीरता और साहस का परिचय दिया था। इसके लिए मरणोपरांत उन्हें देश के सर्वोच्च पुरस्कार परमवीर से सम्मानित किया गया।

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