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गुमला के गांव में भी है एक अन्ना हजारे

झारखंड के गुमला जिले का हापामुनी गांव बड़ी तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। यह संभव हुआ है अवधमनी पाठक के संकल्प और प्रयासों के कारण।

राज्य सरकार की सेवा में रांची में पदस्थापित होने के बावजूद पाठक का सरोकार हापामुनी गांव से बना हुआ है। कुछ साल पहले उन्होंने इस गांव की गरीबी और खराब हालत देख कर इसका चेहरा बदलने का फैसला किया। गांव में करीब एक सौ एकड़ जमीन बंजर पड़ी थी।

उन्होंने ग्रामीणों को जागरूक किया, विकल्प सुझाए और फिर जुट गए संकल्प को पूरा करने में। उन्होंने ग्रामीणों को बंजर जमीन में लेमन ग्रास की खेती करने के लिए प्रेरित किया। आज इससे हर दिन तेल निकाला जाता है। रांची समेत अन्य बड़े शहरों में इसकी खासी मांग है। इस तेल को चाय में डालने से नींबू की सुंगध आ जाती है।

दूसरे चरण में पाठक ने डेयरी के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया। उनके प्रयास से विदेशी नस्ल की 23 गाएं इस गांव की डेयरी में हैं। ग्रामीणों के सहयोग से चलनेवाली इस डेयरी में हर दिन दो सौ लीटर दूध का उत्पादन होता है।


इसकी पैकिंग कर प्रखंड मुख्यालय में इसे बेचा जाता है। पशु चारे के लिए ग्रामीणों ने सूडान और जय घास की खेती कर रखी है। तीसरे चरण में पाठक ने ग्रामीणों को स्ट्रॉबेरी की खेती की ओर मोड़ा। इस खेती से करीब 60 ग्रामीण जुड़े हुए हैं।

पाठक के संकल्प और प्रयासों को देख कर बैंक ऑफ इंडिया की घाघरा शाखा ने हापामुनी गांव को गोद ले लिया है। कभी अंधेरे और गरीबी की छाया में रहनेवाला यह गांव अब पूरी तरह से बदल गया है। आसपास के इलाके में पाठक को दूसरा अन्ना हजारे कहा जाने लगा है।

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  • Web Title:गुमला के गांव में भी है एक अन्ना हजारे