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आयातित उर्वरकों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी

सरकार ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि देश में आयातित रसायनिक उर्वरकों की कीमतों में तीन गुना तक की बढ़ोतरी हुई है।

केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री श्रीकांत जेना ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के नरेश अग्रवाल के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह स्वीकार करते हुए कहा कि यूरिया को छोड़कर अन्य उर्वरकों के लिए भारत दूसरे देशों पर निर्भर है और वर्ष 2010 के बाद से विदेशों में कीमतें बढ़ने से घरेलू स्तर पर उर्वरकों की कीमतों में तीन गुना तक की बढ़ोतरी हुई है।

हालांकि यूरिया की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। अग्रवाल ने सहकारी क्षेत्र की रसायनिक उर्वरक कंपनी इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर्स कोपरेटिव लिमिटेड (इफको) और इंडियन पोटास लिमिटेड (आईपीएल) पर प्रति वर्ष देश के किसानों की पांच हजार करोड़ रुपए की सब्सिडी हड़पने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन कंपनियों ने सरकार को सब्सिडी दिए जाने पर उर्वरकों की कीमतें नहीं बढ़ाने का लिखित आश्वासन दिया था। इसके बावजूद कीमतों में क्यो बढ़ोतरी हुई है।

इस पर जेना ने कहा कि इफको, आईपीएल और उर्वरक उत्पादक कंपनियों के संगठनों ने भी ऐसा आश्वासन दिया था और कहा था कि पहले वर्ष कीमतों में अधिकतम 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि उर्वरकों की कीमतों में यह बढ़ोतरी वर्ष 2011-12 के बाद अधिक हुई है।

मंत्री ने स्वीकार किया कि देश के कुछ हिस्से में डीएपी के 50 किलोग्राम के एक पैकेट की कीमत 1300 रुपए तक पहुंच गई है।

 

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