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सरकार ने कपास निर्यात पर लगी पाबंदी हटाई

कपास निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ बने भारी राजनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए सरकार ने सोमवार को कपास निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा लिया। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार 5 मार्च, 2012 को जारी अधिसूचना वापस लेती है।
   
अधिसूचना में कहा गया कि नए आरसी (पंजीकरण प्रमाणपत्र) अगले आदेश तक जारी नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि पहले से जारी आरसी की वैधता की भी पुन: जांच करानी होगी। अधिसूचना के मुताबिक, सभी जारी किये गये आरसी को जांच व वैधता परखने के लिए डीजीएफटी के पास जमा करना होगा। आरसी की वैधता पुन: स्थापित किए जाने के बाद ही निर्यात प्रभावी हो सकता है।
  
उल्लेखनीय है कि वाणिज्य मंत्रालय के अधीन आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय ने 5 मार्च को ही कपास निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। गुजरात से एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद कल वाणिज्य मंत्री आनन्द शर्मा ने कहा था कि किसानों, उद्योग व व्यापार के हितों में प्रतिबंध लगाने का निर्णय वापस लिया जाएगा।
  
कपास निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के तुरंत बाद कृषि मंत्री शरद पवार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस बाबत नाराजगी जाहिर की थी। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सरकार के इस निर्णय का विरोध किया था।
  
निर्यात पर पाबंदी लगाए जाने से पहले तक करीब 120 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) के लिए निर्यात अनुबंध पंजीकृत किए जा चुके थे जिसमें से 94 लाख गांठ का लदान किया जा चुका था।
  
पिछले सप्ताह के शुरू में कपड़ा मंत्रालय ने कहा था कि घरेलू खपत और उपलब्धता को ध्यान में रखते हुये निर्यात पर यह प्रतिबंध लगाया गया था।  मंत्रालय ने कहा निर्यात के लिये 84 लाख गांठ कपास उपलब्धता के मुकाबले 94 लाख कपास को पहले ही निर्यात किया जा चुका है।

माना जा रहा है कि इस रफतार से मार्च मध्य तक ही कपास निर्यात 100 लाख गांठ तक पहुंच जायेगा। अब तक 120 लाख गांठ के कपास निर्यात के लिये पंजीकरण किया जा चुका है।

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