DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

'फिल्मों से लोकसंगीत को मिलता है एक बड़ा मंच'

फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' का लोक गीत 'तार बिजली' इन दिनों ज्यादातर संगीत प्रेमियों की जबान पर है। इस गीत को गाने वाली वाली बिहार की जानी मानी लोक गायिका पदमश्री शारदा सिन्हा का कहना है कि अनुराग कश्यप की इस फिल्म के लिए गाना उनके लिए एक अच्छा अनुभव रहा।        

सिन्हा ने बताया कि फिल्मों से लोक संगीत को बड़ा मंच मिलता है और जिन फिल्मों में भी मूल लोक संगीत को अपनाया गया है उनमें से ज्यादातर फिल्में सफल रही हैं।
    
तार बिजली गीत से अरसे बाद बॉलीवुड के रूपहले पर्दे पर अपनी आवाज का जादू बिखेर रहीं सिन्हा ने बताया कि तार बिजली एक विवाह लोकगीत है। साथ ही यह अप्रत्यक्ष रूप से बिहार के हालात के बारे में भी बताता है और व्यापक रूप से राजनीतिक-सामाजिक परिप्रेक्ष्य में व्यंग्यात्मक भी है।
    
59 वर्षीय गायिका ने फिल्म के निर्देशक अनुराग कश्यप और संगीतकार स्नेहा खानवलकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि अनुराग ने गाने के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की। इससे गाने की मौलिकता बनी रही। इसे वाद्ययंत्रों की आवाज से भरा नहीं गया। वहीं स्नेहा बहुत जुझारू संगीतकार हैं। मैंने पहले उनसे कहा कि मैं यह गीत नहीं गा पाउंगी क्योंकि ये अलग तरह का है। इस पर स्नेहा ने कहा कि इसे आप ही गा सकती हैं। मुझे ऐसी ही गायिकी चाहिए।
   
फिल्म 'मैंने प्यार किया' के सुपरहिट गीत 'कहे तोसे सजना' के जरिये पहली बार हिन्दी सिनेमाप्रेमियों को अपनी आवाज का मुरीद बनाने वाली लोक गायिका ने अपने गायन के बारे में कहा कि उनके गीत लोकसंगीत और शास्त्रीय संगीत का सम्मिश्रण हैं।

मैथिली, भोजपुरी और हिन्दी भाषा में गायन करने वाली सिन्हा ने वर्तमान दौर के संगीत पर बात करते हुए कहा कि नए लोग प्रतिभावान हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर की गायिकी पर बाजार हावी है। नए गीतों के बोल उन्हें अच्छे नहीं लगते और लोक संगीत के नाम पर भी मिश्रण हो रहा है, शुद्ध ठेठपन नहीं हैं।
   
पिछले 35 सालों से गायिकी कर रही गायिका ने युवाओं को संगीत का भविष्य बताते हुए कहा कि लोक संगीत की लोकप्रियता और पहचान युवाओं के हाथों में हैं। उन्हें इसे गहराई से समझकर आत्मसात करना चाहिए। सिन्हा ने लोकसंगीत को विश्वविद्यालयों के पाठयक्रम में शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि संगीत तो विश्वविद्यालयों के पाठयक्रम में शामिल है ही, लोक संगीत को भी अलग से पाठयक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। हमारा देश गांवों का देश है। हमारी लोक कला और संस्कृति बहुत समद्ध है, हमें इसे और आगे ले जाना होगा।
   
देश विदेश में कई कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकी सिन्हा ने बिहार-उत्तप्रदेश के पारंपरिक त्यौहार छठ पूजा के लिए भी ढ़ेरों गीत गाये हैं। उनके छठ त्यौहार के गाये गीत इस पर्व को मनाने वालों लोगों के लिए ईश्वर की वंदना की तरह है। उन्होंने मैंने प्यार किया के गीत कहे तोसे सजना और हम आपके हैं कौन के गीत बाबुल जो तुमने सिखाया, प्रसिद्ध भोजपुरी गीत पनिया के जहाज, सुन लो परदेसिया आदि गाये हैं।
   
सिन्हा जर्मनी, नीदरलैंड, सूरीनाम, मॉरीशस, मिस्र जैसे कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं। बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली गायिका वर्तमान में वहां के एक कॉलेज में छात्रों को संगीत की शिक्षा दे रही हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:'फिल्मों से लोकसंगीत को मिलता है एक बड़ा मंच'