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न्याय मांगती गंगा 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से अवैध बूचड़खानों को बंद कराया, प्रशासनिक दफ्तरों का निरीक्षण किया और एंटी रोमियो दस्तों का गठन किया है, उसी तत्परता से  उनको गंगा की सफाई के बारे में भी सोचना चाहिए। उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री गंगा को प्रदूषित करने वाली सभी कंपनियों और होटलों को बंद करवाएं। गंगा के जल को उत्तर प्रदेश में प्रदूषण मुक्त कराया जाए। लोग कहते हैं कि उत्तराखंड में तो गंगा का पानी इतना साफ होता है कि हम उसमें सुई भी आसानी से ढूंढ़ सकते हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश में आकर गंगा का पानी इतना प्रदूषित हो जाता है कि अगर आप उसमें बड़ा पत्थर भी फेंकें, तो वह आपको दिखाई नहीं देगा। मुख्यमंत्री से मेरा यही कहना है कि गंगा इंसाफ मांग रही है। क्या आप उसे इंसाफ दिलाएंगे? 
फैजान चौधरी, बागपत 

प्रदूषण से मुक्ति नहीं 
सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक अप्रैल से बीएस-3 वाहनों की बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगा देने के बाद वाहन एजेंसियों ने ऑफर की बरसात कर दी। बीएस-3 वाहन से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए कोर्ट ने यह आदेश दिया। लेकिन जिस तेजी से कुछ घंटों में ही बीएस-3 के वाहनों की बिक्री हुई है, वे वाहन आने वाले कुछ दिनों में प्रदूषण की मात्रा को और ऊंचे स्तर पर ले जाएंगे। इसके लिए वाहन कंपनियां जिम्मेदार हैं। बीएस-4 के नियम अप्रैल महीने से लागू होंगे, यह बात वाहन-निर्माण कंपनियों को पता थी। फिर भी, उन्होंने बीएस-4 के मुताबिक वाहनों के निर्माण को गंभीरता से नहीं लिया। कोर्ट जब बीएस-3 के मुद्दे पर सख्ती से पेश आया, तब इनके होश उड़ गए और अपना नुकसान टालने के लिए भारी छूट देकर वाहनों की बिक्री शुरू कर दी। इस छूट से बीएस-3 वाहन तो बिक गए, लेकिन प्रदूषण से हमें छूट नहीं मिलेगी। 
मानसी जोशी 

कब मिलेंगे सही दाम 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों को उनकी फसल के दोगुने दाम दिलाने की बात कही है। लेकिन ऐसा करने के लिए सरकार को पहले से एक अच्छी और कुशल योजना सोचकर रखनी पड़ेगी। सरकार को किसानों के हित में होने वाले इस कार्य के लिए एक समिति गठित करनी चाहिए, जिससे यह कार्य और आसान हो सके। वर्तमान में किसानों को उनकी फसल के सही दाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में किसानों के हजारों करोड़ रुपये गन्ना मिलों पर बकाया हैं। पर हमारी सरकारें बड़े मिल मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में नाकाम हैं। किसानों के लिए यह एक बड़ी राहत की बात है कि उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में किसानों की कर्ज माफी की बात कही थी। लेकिन इस संबंध में अब बैंकों ने तीखे बोल बोलने शुरू कर दिए हैं। इसलिए प्रधानमंत्री किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक स्पष्ट योजना बनाएं, क्योंकि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां कृषकों को लाभ मिलने ही चाहिए।
अमन सिंह, बरेली, उत्तर प्रदेश

गेस्ट शिक्षकों की सुध लें
उत्तराखंड में सवाल गेस्ट टीचर्स की सेवा समाप्ति का नहीं, अपितु पर्वतीय क्षेत्र के स्कूली छात्रों के भविष्य का है। गेस्ट शिक्षकों ने स्थायी शिक्षकों की अपेक्षा छात्रों पर कहीं अधिक मेहनत की और शिक्षण कार्य मन लगाकर किया, जिसके परिणाम अच्छे आए। इनका चयन भी पारदर्शी प्रक्रिया के तहत मेरिट के आधार पर हुुआ था। फिर क्यों सरकार उन्हें सेवा विस्तार नहीं दे रही है? अन्य प्रदेशों में भी गेस्ट टीचर्स की सेवाएं वर्षों से जारी हैं, जिनके अध्यापन से वहां शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। उत्तराखंड में हम अनिश्चितता की स्थिति में क्यों हैं? क्या शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे दिन कभी आएंगे?
गौरव रावत

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  • Web Title:ganga river seeking justice