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10 दिसंबर, 2019|8:00|IST

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तेजिंदर सिंह के आग्रह पर सरकार ने मांगा समय

केंद्र ने पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह के उस आग्रह पर जवाब देने के लिए शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से और समय मांगा जिसमें सेना मुख्यालय को पांच मार्च को जारी इसकी प्रेस विज्ञप्ति वापस लेने के निर्देश देने को कहा गया है।

विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया था कि एक रक्षा सौदे को मंजूर कराने के लिए तेजिंदर सिंह ने सेना प्रमुख को रिश्वत की पेशकश की थी।
  
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता के समक्ष पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एएस चंडोक ने मुद्दे पर कोई रुख अपनाने के लिए यह कहकर एक हफ्ते का समय मांगा कि विभिन्न अधिकारियों से संबंधित फाइलें उनके पास नहीं पहुंची हैं जिनके नाम तेजिंदर सिंह ने अपनी याचिका में लिए हैं।
  
इससे पूर्व, तेजिंदर सिंह के आग्रह पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गुप्ता ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या तेजिंदर के खिलाफ आरोपों वाली प्रेस विज्ञप्ति सरकार द्वारा जारी की गई या इसे सेना अधिकारियों ने अपनी निजी हैसियत से जारी किया।
  
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के निवेदन को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति गुप्ता ने आज सरकार से कहा कि वह मुददे पर सात मई तक जवाब दे।
  
तेजिंदर सिंह ने अपने वकील अनिल क़े अग्रवाल के जरिए दायर अपनी आपराधिक रिट याचिका में तर्क दिया था कि सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति मानहानिकारक है जिसे वापस लिया जाना चाहिए।
  
तेजिंदर सिंह उन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने के आग्रह को लेकर अदालत पहुंचे थे जिनके नाम उन्होंने अपनी याचिका में लिए हैं। जनरल वीके सिंह के अतिरिक्त, तेजिंदर सिंह ने सेना के उप्र प्रमुख एसके सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल बीएस ठाकुर (डीजी एमआई), मेजर जनरल एसएल नरसिम्हन (अतिरिक्त महानिदेशक, जन सूचना) और लेफ्टिनेंट कर्नल हितेन सावनी के नाम मामले में आरोपियों के रूप में लिए हैं।

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