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विदेशी फंड पर बजट में भ्रम बरकरार

मॉरीशस और उस जैसे अन्य टैक्स हैवेन (ऐसे देश जहां नागरिकों और कम्पनियों को अन्य देशों की तुलना में कम कर देना पड़ता है) से आए निवेश पर होने वाले पूंजी लाभ पर कर जैसे कुछ बजटीय प्रस्ताव पर भ्रम पैदा होने के एक दिन बाद भी संदेह के बादल छंटे नहीं हैं, जिससे बाजार से उत्साह गायब है।

वित्त मंत्री पी चिदम्बरम ने गुरुवार को बजट भाषण में कहा था कि कर चोरी के कुछ मामले सामने आए हैं और मैं उसकी गुंजाइश खत्म करने का प्रस्ताव करता हूं। कुछ गैर सूचीबद्ध कम्पनियों ने बायबैक जैसे साधनों का इस्तेमाल कर लाभांश वितरण कर नहीं चुकाया।

विश्लेषकों के मुताबिक गुरुवार को बाजार में गिरावट का यही प्रमुख कारण रहा, क्योंकि बजटीय प्रावधान में कहा गया कि विदेशी फंड सिर्फ मॉरीशस जैसे देशों से कर निवासी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर ही कर के दायरे में आने से नहीं बच सकते हैं। वित्त विधेयक के संशोधन प्रस्ताव में कहा गया है, भारत से बाहर निश्चित क्षेत्र में रहने का प्रमाण पत्र जरूरी होगा, लेकिन यहां बताए गए समझौते के तहत राहत का दावा करने के लिए समुचित शर्त नहीं होंगे।

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को बम्बई स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 290 अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी। शेयर बाजार के बंद होने के बाद वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यदि यह आशंका है कि आप भले ही निवासी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें, कर अधिकारी उसे स्वीकार नहीं करेंगे, तो यह गलत है।

बजट के बाद संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री ने कहा कि यदि वित्त विधेयक में प्रस्तावित संशोधन की भाषा से ऐसा अर्थ लगाया जा रहा है, तो उसे बदल दिया जाएगा। एक रिसर्च कम्पनी एंजल ब्रोकिंग ने कहा कि बजट के बाद वित्त मंत्री ने बताया था कि संशोधन में कहा यह गया है कि सिर्फ निवासी ही नहीं, बल्कि लाभार्थी स्वामित्व भी डबल टेक्सेशन अवॉयडेंस एग्रीमेंट के तहत लाभ का दावा करने के लिए जरूरी होगा।

कम्पनी ने अपने बयान में कहा कि सरकार चालू खाता घाटा के लगातार बढ़ने पर रोक लगाने के लिए डॉलर को आकर्षित करने के लिए काफी कुछ किया है, लेकिन अब यह देखना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की शंका के समाधान के लिए कोई स्पष्टीकरण आता है या नहीं।

 

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