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फूड टेक्नोलॉजिस्ट: भोजन के बॉडीगार्ड

फूड टेक्नोलॉजी आज के युवाओं के लिए एक आकर्षक करियर के रूप में सामने आ रही है। पर इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक प्रशिक्षित कर्मियों की मांग पूरी कर पाना अभी मुश्किल हो रहा है। आने वाले समय में इसमें रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। इस बारे में बता रहे हैं संजीव कुमार सिंह

देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। साथ ही रोजगार प्रदान करने के मामले में भी इनका कोई सानी नहीं है। जैसे-जैसे उद्योग विकास कर रहा है, क्षेत्र विशेष के प्रोफेशनल्स की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इन्हीं में से एक फूड टेक्नोलॉजी का क्षेत्र भी है। लोगों की जीवनशैली में बदलाव और खान-पान में दिलचस्पी के चलते इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है।

फास्ट फूड संस्कृति भी तेजी से विकसित हो रही है और पित्जा आदि का बाजार भी गति पकड़ रहा है। आज स्थिति यह है कि जितनी मांग है, उसके हिसाब से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। विदेशों से भी कुशल लोगों की मांग आ रही है। कुशल लोगों की मांग पूरी कर पाना इस उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इस बात को विशेषज्ञ भी स्वीकारते हैं।

क्या है फूड टेक्नोलॉजी
फूड टेक्नोलॉजी एक ऐसी शाखा है, जिसके अंतर्गत किसी भी खाद्य उत्पाद के उत्पादन, भंडारण, परीक्षण, पैकेजिंग तथा वितरण संबंधी कार्य किए जाते हैं। इसके अंतर्गत सभी प्रकार के भोज्य पदार्थों, जैसे मीट, फल, सब्जियां, मछली, अनाज, अंडा, दूध आदि को शामिल किया जाता है। किसी भी फूड टेक्नोलॉजिस्ट का पहला कार्य कच्चे पदार्थों की जांच, भोज्य पदार्थों की क्वालिटी बनाए रखने, भोजन का परीक्षण, न्यूट्रीशन वैल्यू जांचने से संबंधित होता है। ये भोजन की प्रोसेसिंग, संरक्षण एवं उन्हें खराब होने से बचाने के लिए कई तरह की तकनीक का इजाद करते हैं। इसके अलावा उन्हें उपभोक्ताओं के वर्तमान ट्रेंड एवं तकनीक को समझते हुए नए विचार विकसित करने होते हैं।

एक नजर उद्योग पर
बेकरी, डेयरी, मांस, मछली, फल एवं सब्जियां आदि उत्पादों की प्रोसेसिंग के अलावा होम डिलीवरी की आसान प्रक्रिया ने इस उद्योग को नई तस्वीर प्रदान की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2003-04 में जहां इस उद्योग का कारोबार 46000 करोड़ रुपए के करीब था, वहीं 2011-12 में यह उद्योग 75,000 करोड़ के करीब पहुंच गया। उद्योग का लक्ष्य है कि 2014-15 तक इसका कारोबार 13,50,000 करोड़ रुपए के करीब पहुंचाया जाए। आज स्थिति यह है कि आर्थिक मंदी के बावजूद 13 प्रतिशत की दर से उद्योग विकास कर रहा है। आने वाले 5-6 सालों में इसके दोगुना होने की उम्मीद है। भारत विश्व के दुग्ध उत्पादक देशों में सर्वोच्च स्थान पर है तथा फल एवं सब्जियों के उत्पादन में दूसरा स्थान है।

कोर्स से जुड़ी जानकारी
फूड टेक्नोलॉजी कोर्स के अंतर्गत विभिन्न बिन्दुओं, जैसे माइक्रोबायोलॉजी, खाद्य संरक्षण तकनीक, जेनेटिक्स, फूड पैकेजिंग आदि को शामिल किया जाता है। हालांकि पिछले कुछ सालों से इसके पाठय़क्रम में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक समय-समय पर बदलाव किया जाता है, ताकि छात्र नई-नई जानकारी से अवगत होते रहें। थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल की जानकारी विविध रूपों में छात्रों को दी जाती है।

कोर्स की रूपरेखा
इसमें बैचलर, मास्टर व डिप्लोमा, कई तरह के कोर्स मौजूद हैं। बैचलर डिग्री तीन साल, मास्टर दो साल तथा डिप्लोमा कोर्स एक साल का होता है। कुछ कोर्स निम्न हैं-

बीएससी इन फूड टेक्नोलॉजी
बीएससी इन फूड साइंस
बीएससी इन फूड एंड न्यूट्रीशन
बीएससी इन फूड प्रिजर्वेशन
एमएससी इन फूड साइंस
एमएससी इन फूड टेक्नोलॉजी
डिप्लोमा कोर्सेज इन फूड एनालिसिस एंड फूड साइंस

इन पदों पर मिलेगा काम
देश व विदेश की प्रमुख कंपनियों में निम्न रूप में संभावनाएं सामने आती हैं-

प्रोडक्शन मैनेजर
क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर
फूड पैकेजिंग मैनेजर
प्रोडक्ट डेवलपमेंट मैनेजर
लेबोरेटरी सुपरवाइजर
फूड इंस्पेक्टर

प्रमुख फूड प्रोसेसिंग कंपनियां
पारले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड
कैडबरी इंडिया लिमिटेड
हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड
एग्रो टेक फूड्स
अमूल
गोदरेज इंडस्ट्रियल लिमिटेड
पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स
नेसले इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
डाबर इंडिया लिमिटेड
ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड

आवश्यक योग्यता
इसके बैचलर कोर्स में प्रवेश के लिए छात्र के पास न्यूनतम डिग्री 10+2 (फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स अथवा बायोलॉजी सहित) होनी चाहिए, तभी बीएससी में एडमिशन मिल पाएगा। जबकि मास्टर एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए शैक्षिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। यदि किसी ने होम साइंस, न्यूट्रीशन, डायटीशियन एवं होटल मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन किया है तो फूड टेक्नोलॉजी में उच्च शिक्षा हासिल कर सकता है।

स्किल्स
एक फूड टेक्नोलॉजिस्ट के अंदर साइंटिफिक, आकलन की क्षमता, बुद्धिमान तथा हेल्थ एवं न्यूट्रीशन में अभिरुचि, काम की पूर्णता जैसा गुण होना जरूरी है। उन्हें टीम के एक महत्वपूर्ण अंग के रूप में काम करना होता है, इसलिए कम्युनिकेशन स्किल्स मजबूत होनी जरूरी है। फूड एवं न्यूट्रीशन के संदर्भ में होने वाले साइंटिफिक एवं टेक्नोलॉजिकल बदलाव से अपडेट रहना भी जरूरी है।

एजुकेशन लोन
छात्रों को प्रमुख राष्ट्रीयकृत, प्राइवेट अथवा विदेशी बैंकों द्वारा एजुकेशन लोन प्रदान किया जाता है। छात्र को जिस संस्थान में एडमिशन लेना होता है, वहां से जारी एडमिशन लेटर, हॉस्टल खर्च, ट्यूशन फीस एवं अन्य खर्चो का ब्योरा बैंक को देना होता है। साथ ही अभिभावक की आय संबंधी प्रमाण पत्र बतौर गारंटर जमा कराना अनिवार्य है। देश के लिए जहां अधिकतम 10 लाख रुपए का लोन है, वहीं विदेशों में अध्ययन के लिए इसकी अधिकतम राशि 20 लाख तय की गई है।

वेतनमान
फूड टेक्नोलॉजिस्ट को शुरुआती दौर में कम से कम 15000 से 20000 रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। दो-तीन साल के अनुभव के पश्चात सेलरी में भी बढ़ोतरी होती है।

विदेशों में प्रोफेशनल्स को आकर्षक सेलरी मिलती है, जबकि फ्रीलांस कंसल्टेंट या एडवाइजर के रूप में काम करने पर योग्यता के अनुसार कीमत मिलती है। चाहें तो अपना काम भी शुरू किया जा सकता है।

संभावनाएं
सफलतापूर्वक कोर्स पूरा करने के बाद कई जगह रोजगार के अवसर मिलते हैं। इसमें मुख्य रूप से फूड प्रोसेसिंग कंपनियों, फूड रिसर्च लेबोरेटरी, होटल, रेस्तरां, एजुकेशनल इंस्टीटय़ूट के अलावा कई सरकारी व प्राइवेट सेक्टर में फूड टेक्नोलॉजिस्ट, फूड इंस्पेक्टर व हेल्थ इंस्पेक्टर के रूप में अपनी सेवा दे सकते हैं।

यदि कोई फ्रीलांस कंसल्टेंट या किसी स्कूल/कॉलेज में रिसर्चर, लेक्चरर, एडवाइजर या हेल्थ डॉक्टर के रूप में कार्य करने का इच्छुक है तो उसे भी निराशा नहीं मिलती। विदेशों में भी काफी अवसर मौजूद हैं।

प्रमुख संस्थान

सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीटय़ूट, मैसूर,
वेबसाइट
-www.cftri.com
नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीटय़ूट, करनाल, हरियाणा
वेबसाइट
-www.ndri.res.in
यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, दिल्ली
वेबसाइट-
www.du.ac.in
गोविन्द बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर
वेबसाइट
- www.gbpuat.ac.in
सीएसके कृषि विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश
वेबसाइट
- www.hillagric.ernet.in
एसएनडीटी वुमन यूनिवर्सिटी, मुंबई
वेबसाइट-
www.sndt.womenuniversity.in
गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर
वेबसाइट-
www.gndu.ac.in

पॉजिटिव/नेगेटिव

हर पल कुछ नया सीखने का अवसर
जॉब के दौरान प्रमोशन की व्यवस्था
हार्डवर्किंग व चैलेंजिंग जॉब
समय अधिक लगता है

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