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हरित क्रांति ने दिखाया रंग, पूरब में लहलहाया धान

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को ऐलान किया कि दूसरी हरित क्रांति लाने के कार्यक्रम के ठोस नतीजे सामने आये हैं और पूर्वी भारत में 2011 के खरीफ सत्र में 70 लाख टन अतिरिक्त धान का उत्पादन हुआ है।
   
मुखर्जी ने लोकसभा में आम बजट पेश करते हुए कहा, मुझे सदन को यह सूचित करते हुए खुशी है कि पूर्वी भारत में हरित क्रान्ति लाने के कार्यक्रम से धान के उत्पादन और उत्पादकता में काफी वृद्धि हुई। पूर्वी भारत के राज्यों ने खरीफ 2011 में 70 लाख टन के अतिरिक्त धान उत्पादन की सूचना दी है।
   
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के परिव्यय को 2011-12 के 7860 करोड रुपये से बढाकर 2012-13 में 9217 करोड रुपये किया जा रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुसार पूर्वी भारत में कषि विकास की जबर्दस्त क्षमता के बावजूद यह हरित क्रान्ति से अप्रभावित रहा था।

इसकी वजह केन्द्र और राज्य सरकारों की उदासीनता थी लेकिन अब पूर्वी क्षेत्र में हरित क्रान्ति से प्रचुर मात्रा में खाद्यान्न है। केन्द्र सरकार ने महसूस किया कि बिहार, पश्चिम बंगाल, उडीसा, असम, छत्तीसगढ, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान का इतना अधिक उत्पादन हुआ कि यह देश के कुल धान उत्पादन के आधे से भी अधिक है।

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