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रिटेल में FDI की नीति पर पुनर्विचार नहीं: सरकार

देश में बहु-ब्रांड खुदरा कारोबार में विदेशी निवेश की मंजूरी वापस लेने की संभावना से इन्कार करते हुए सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह आने वाले समय में दिशानिर्देश जारी करेगी।

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के सचिव पी के चौधरी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में ऐसे नियम बनाए जाएंगे जो इस मसले पर मंत्रिमंडल में हुई चर्चा और वहां उठाए गए सवालों का उत्तर दे सकें।

यह पूछने पर कि क्या सरकार खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की घोषित नीति संबंधी नियम जारी करने से पहले उस पर फिर सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित करेगी, चौधरी ने कहा कि ऐसा कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने कहा यदि मैं आपको हां में जवाब देता हूं तो इसका मतलब है कि मैं इस बात को मान रहा हूं कि हम इस नीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं , लेकिन ऐसा नहीं कर रहे हैं। चौधरी ने कहा कि उनके विभाग ने इस नीति को बनाते समय सीधे तौर पर राज्य सरकारों को पत्र नहीं लिखा था। पर इस विषय में वाणिज्य मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थाई समिति में जब चर्चा की गई थी तो राज्यों से परामर्श किया गया था।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा चर्चा पत्र के तौर पर प्रस्ताव उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध था और राज्य इस पर प्रतिक्रिया देने के लिए स्वंतत्र थे। बहु-ब्रांड खुदरा में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और एकल-ब्रांड खुदरा कारोबार को पूरी तरह से खोलने का फैसला 24 नवंबर को मंत्रिमंडल ने किया। चौधरी ने बिना समयसीमा का संकेत दिए कहा  बहु-ब्रांड खुदरा कारोबार के दिशानिर्देश बनाने की प्रक्रिया को रोका नहीं गया है, इसका काम चल रहा है।

बहु-ब्रांड खुदरा कारोबार में एफडीआई की अनुमति देने के सरकार फैसले ने राजनैतिक तूफान पैदा कर दिया है, संसद की कार्यवाही बाधित है और व्यापारी प्रदर्शन पर उतर आए हैं।

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