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'फारबिसगंज गोलीकांड: सीबीआई जांच का औचित्य नहीं'

बिहार सरकार ने गुरुवार को पुन: दोहराया कि फारबिसगंज पुलिस फायरिंग मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किए जाने के बाद सीबीआई से उस घटना की जांच कराने का औचित्य नहीं है।

बिहार विधान परिषद में राजद के मो. तनवीर हसन द्वारा पूछे गए एक अल्पसूचित प्रश्न का सरकार की ओर से उत्तर देते हुए जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि फारबिसगंज पुलिस फायरिंग मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किए जाने के बाद सीबीआई से उस घटना की जांच कराने का औचित्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि चार जून वर्ष 2011 को घटित इस घटना की जांच के लिए सरकार ने 22 जून 2011 को एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया था, जिसे छह माह के भीतर अपना जांच प्रतिवेदन देना था।

चौधरी ने कहा कि आयोग के अध्यक्ष ने 29-30 जुलाई 2011 को घटनास्थल का भ्रमण किया तथा स्थानीय लोगों तथा जिला प्रशासन से घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त की। आयोग द्वारा स्थानीय समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित कर व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह, संगठन, संस्थान अथवा उक्त सभी जो इस कार्रवाई में अभिरूचि रखते हों से अपना शपथ पत्र लिखित बयान एवं सुसंगत साक्ष्य व्यक्तिगत रूप से अथवा निबंधित डाक द्वारा 25 नवंबर 2011 तक भेजे जाने को कहा था।

उन्होंने बताया कि निर्धारित अवधि तक आयोग को कुल 189 आवेदन पत्र हुए जिसकी सुनवाई की तिथि आयोग द्वारा निर्धारित की जाएगी।

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