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भारत-चीन विमानन उद्योग में डालेंगे जान: अजित सिंह

यूरोपीय ऋण संकट से 2011 में वैश्विक विमानन उद्योग प्रभावित हुआ है लेकिन उम्मीद है कि वृद्धि दर्ज कर रहे भारतीय और चीनी बाजार इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करेंगे। यह बात नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने बुधवार को कही।
   
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 2011 मुश्किल दौर था। ईंधन की बढ़ती लागत और यूरोपीय ऋण संकट का असर पूरे विश्व पर देखा गया और विमानन उद्योग पर भी इसका असर दिखा। अनुमान के मुताबिक वैश्विक माल बाजार 0.7 फीसदी सिकुड़ा।
   
मंत्री ने कहा कि सवारी और कार्गो दोनों खंडों में क्षमता की बढ़ोतरी के मुकाबले मांग में बढ़ोतरी कम रही जिससे आय और यात्रियों की संख्या दोनों पर असर हुआ। उन्होंने कहा कि हालात में तुरंत सुधार की उम्मीद नहीं है और 2012 में उतना ही चुनौतीपूण हो सकता है।
   
सिंह ने कहा कि बाजार अनुमान के मुताबिक यूरोपीय विमानन कंपनियां 2012 में सबसे अधिक प्रभावित होंगी। हालांकि उम्मीद है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र इस खंड को प्रोत्साहित करेगा जिसका नेतत्व भारत और चीन के बाजार करेंगे। यह बात विमानन मंत्री ने बेगमपेट हवाईअड्डे पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन प्रदर्शनी और सम्मेलन के तीसरे सत्र के उद्घाटन के बाद कही।
   
उन्होंने कहा कि यह रुख अगले कुछ साल तक बरकरार रह सकता है जिससे विमानन क्षेत्र का केंद्र पूर्वी देश बनेंगे। 2015 तक यात्री यातायात में एशिया प्रशांत का योगदान 37 फीसद होगा जबकि यूरोपीय और उत्तरी अमेरिकी हवाई यातायात घटकर 29 फीसदी हो जाएगा।
   
सिंह ने कहा कि भारत विश्व भर की विमानन कंपनियों के लिए गठजोड़ और इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी के विस्तार के बड़े मौके पेश करता है। मंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने विमानन क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई। घरेलू विमानन कंपनियों के जरिये 2011 में करीब छह करोड़ लोगों ने यात्रा की जबकि पिछले दशक में यह तादाद 1.3 करोड़ थी।
   
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से वृद्धि दर्ज कर रहा नागर विमानन बाजार बाजार है और 2020 तक भारतीय हवाईअड्डा प्रणाली करीब 42 करोड़ यात्रियों को सेवा प्रदान करेगी जबकि 2010 में यह संख्या 14 करोड़ थी।
   
सिंह ने कहा कि ईंधन की बढ़ती लागत, कड़ी प्रतिस्पर्धा और बुनियादी ढांचे की दिक्कतों के बावजूद सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने वाली कई नीतियां और नियम बनाए गए हैं।
   
मंत्री ने कहा कि हवाईअड्डा क्षेत्र में देश भर में पीपीपी मॉडल पर कई नई परियोजनाएं और आधुनिकीकरण की योजनाएं शुरू हुई हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों और परिचालन प्रदर्शन के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जा सकें।
   
उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार नए हवाईअड्डों के लिए 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को अनुमति दे रही है ताकि देश में वैश्विक स्तर के हवाईअड्डे तैयार हो सकें।

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