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औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर में भारी गिरावट

अर्थव्यवस्था में बरकरार नरमी को जाहिर करते हुए औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर इस साल फरवरी में घटकर 4.1 फीसदी रह गई है। ऐसा मुख्य तौर पर विनिर्माण क्षेत्र और उपभोक्ता उत्पाद खंड के खराब प्रदर्शन के कारण हुआ है।
   
औद्योगक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर आंके जाने वाले औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर फरवरी 2011 में 6.7 फीसदी थी। गुरुवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक आईआईपी की जनवरी की वृद्धि दर के अंतिम आंकड़े को संशोधित कर 1.14 फीसदी कर दिया गया है जबकि अस्थाई अनुमान 6.8 फीसदी का था।
   
विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन फरवरी में सिर्फ चार फीसदी बढ़ा जबकि फरवरी 2011 में यह 7.5 फीसदी था। आईआईपी में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान करीब 75 फीसदी है। उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में भी कमी हुई। इस क्षेत्र का उत्पादन भी फरवरी में 0.2 फीसदी घटा।
   
इसके अलावा टिकाउ उपभोक्ता खंड का उत्पादन फरवरी में 6.7 फीसदी घटा जबकि पिछले साल की समान अवधि में इस खंड में 18.2 फीसदी वृद्धि दर्ज हुई थी। हालांकि पूंजीगत उत्पाद क्षेत्र में वृद्धि दर 10.6 फीसदी रही जबकि पिछले साल फरवरी में 5.7 फीसदी की कमी हुई थी।
   
खनन उत्पादन में भी फरवरी के दौरान 2.1 फीसदी का सुधार नजर आया जबकि फरवरी 2011 में 1.2 फीसदी की वृद्धि हुई थी। बिजली उत्पादन में फरवरी के दौरान आठ फीसद की वृद्धि दर्ज हुई जबकि पिछले साल के उसी महीने में 6.8 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई थी।
   
इस महीने 22 में से 18 औद्योगिक समूहों ने फरवरी में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। मूल उत्पादों का उत्पादन 7.5 फीसदी बढ़ा जबकि पिछले साल फरवरी में 5.5 फीसदी बढ़ा था। हालांकि मध्यस्थ उत्पादों में 0.6 फीसदी की कमी दर्ज हुई जबकि पिछले साल फरवरी में 6.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई।
   
अप्रैल-फरवरी 2011-12 के दौरान आईआईपी की वृद्धि दर 3.5 फीसदी रही जबकि 2010-11 की समान अवधि में यह 8.1 फीसदी थी। अप्रैल से फरवरी के दौरान आईआईपी की कुल 3.5 फीसदी की धीमी वृद्धि दर के कारण रिजर्व बैंक अपनी सालाना मौद्रिक नीति में अल्पकालिक ऋण और उधारी दर में कमी कर सकता है। सालाना मौद्रिक नीति का अनावरण अगले सप्ताह होना है।
   
उद्योग ने वृद्धि में नरमी के लिए उच्च ब्याज दर को जिम्मेदार ठहराया है जिसके कारण उधारी मंहगी हुई और उपभोक्ता खर्च में कमी आई। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के प्रमुख सी रंगराजन ने कहा थाकि आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में कटौती मुद्रास्फीति की गतिविधि पर निर्भर करेगी।
   
ताजा आंकड़ों के मुताबिक फरवरी के महीने में सकल मुद्रास्फीति 6.95 फीसदी पर बनी हुई है।

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