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भ्रष्टाचार से गरीबी के दलदल में फंसा रहेगा देश

संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2012 में कहा गया कि बाजार निजी हित से संचालित होता है, लेकिन इसके साथ ही कहा गया कि नैतिकता के अभाव और रिश्वतखोरी के कारण देश गरीबी के दलदल में फंसा रहेगा।

मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु द्वारा तैयार आर्थिक सर्वेक्षण को केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने संसद में पेश किया। सर्वेक्षण में कहा गया, ''अब हम यह समझ चुके हैं कि अगर लोग पूरी तरह स्वार्थी हो जाएं, तो बाजार अर्थव्यवस्था नहीं चल सकती।''

इसमें कहा गया कि स्वार्थ आर्थिक विकास की चाबी है, लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि ईमानदारी और भरोसे से ही समाज बनता है। इसमें कहा गया कि यदि किसी देश में ईमानदारी का अभाव है, तो पूरी सम्भावना है कि देश गरीबी के दलदल में फंसा रह जाएगा।

सर्वेक्षण में विभिन्न अनुमानों के मुताबिक गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों का अलग-अलग अनुपात बताया गया। लाकड़ावाला समिति और तेंदुलकर समिति के मुताबिक 2004-05 के लिए गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों का अनुपात क्रमश: 27.5 फीसदी और 37.2 फीसदी बताया गया।

तेंदुलकर समिति के मुताबिक 2004-05 में ओडिशा में सर्वाधिक 57.2 फीसदी गरीबी, उसके बाद बिहार में 54.4 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 49.4 फीसदी गरीबी थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 37.2 फीसदी था।

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