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पीपीपी से ढांचागत उद्योग में आएगी तेजी

संसद में गुरुवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2०11-12 में कहा गया है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) से ढांचागत उद्योग में तेजी आएगी। सर्वेक्षण के मुताबिक योजना आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में ढांचागत क्षेत्र में जितने निवेश की जरूरत बताई है उसका लगभग आधा हिस्सा निजी क्षेत्र से आने का अनुमान है।

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इसमें कहा गया कि पीपीपी से संसाधन तो बढ़ेगा ही ढांचागत सेवा की अदायगी क्षमता भी बढ़ेगी।

योजना आयोग ने 12वीं योजना अवधि (2०12-17) में 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत का अनुमान जताया है। सर्वेक्षण के मुताबिक, ''इसमें से आधा निवेश निजी क्षेत्र से आने का अनुमान है। ग्यारहवीं योजना अवधि में 36 फीसदी निजी निवेश का अनुमान लगाया गया था।''

योजना आयोग के मुताबिक सार्वजनिक निवेश भी इस अवधि में 22.5 लाख करोड़ होना चाहिए, जो 11वीं येाजना में 13.1 लाख करोड़ था।

सर्वेक्षण के मुताबिक बिजली, पेट्रोलियम रिफायनरी, सीमेंट और रेलवे ढुलाई क्षेत्र में विकास दर्ज किया गया है। जबकि मोबाइल फोन की संख्या, कोयला, प्राकृतिक गैस, रासायनिक खाद, विमानों से माल निर्यात जैसे क्षेत्रों में गिरावट आई है।

सर्वेक्षण के मुताबिक मौजूदा कारोबारी साल में ढांचागत क्षेत्रों में कर्ज में गिरावट दर्ज की गई है। सर्वेक्षण में कहा गया कि ढांचागत क्षेत्रों में बड़े निवेश आकर्षित करने के लिए नई-नई योजनाएं शुरू की जानी चाहिएं।

 

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