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अगले वित्त वर्ष से गति पकड़ेगी अर्थव्यवस्था

संसद में गुरुवार को प्रस्तुत 2011-12 की आर्थिक समीक्षा में उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था गति पकड़ेगी और मंहगाई का दबाव कम होने से निकट भविष्य में कर्ज सस्ता होगा।
 
लेकिन समीक्षा में सरकार के खजाने के हालत पर चिंता जाहिर करते हुये कहा गया है कि कच्चे तेल के दाम में उछाल के जोखिम को ध्यान में रख कर राजकोषीय संतुलन के ठोस कदम उठाए जाने चाहिये।
 वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा पेश आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है जो पिछले वित्त वर्ष की 8.4 प्रतिशत की वृद्धि से कम है। पर इसमें उम्मीद जताई गयी है कि आगामी अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्त वार्षिक में आर्थिक गतिविधियों में सुधार होगा। समीक्षा के अनुसार 2012-13 तथा 2013-14 में आर्थिक वृद्धि दर क्रमश: 7.6 प्रतिशत तथा 8.6 प्रतिशत रहेगी।
  
इसमें संकेत है कि राजकोषीय घाटे को सीमित रखने के चालू वित्त वर्ष के लक्ष्य हासिल नहीं होंगे। हालांकि, समीक्षा में कहा गया है कि इस मामले में राज्यों के अपने ट्रैक पर रहने की संभावना है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे दाम से बढ़ता सब्सिडी बोझ और राजस्व वसूली अनुमान से कम रहने की वजह से केन्द्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान की तुलना में ऊंचा रहने की आशंका जताई गई है।
 
महंगाई के मामले में समीक्षा में कहा गया है कि इसपर निरंतर नजर रखे जाने की आवश्यकता है। अप्रत्याशित वैश्विक घटनाओं और कच्चे तेल के दाम में वृद्धि जैसे वैश्विक आघातों से निपटने के लिये शीघ्र उपाय किये जाने की आवश्यकता है।

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