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SC को दिलाया ईवीएम की विश्वसनीयता का भरोसा

निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के दुरुपयोग या उनसे छेड़छाड़ की आशंका दूर करने के लिए वह विश्वसनीय पद्धति अपनाने पर विचार कर रहा है।

निर्वाचन आयोग इस मसले पर तमाम तकनीकी विशेषज्ञों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की राय ले रहा है। न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की खंडपीठ को निर्वाचन आयोग की ओर से पूर्व अटार्नी जनरल अशोक देसाई ने पिछले गुरुवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग इस मसले पर तकनीकी विशेषज्ञों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की राय लेकर विभिन्न कदम उठा रहा है। न्यायालय ने अशोक देसाई के इस कथन के बाद जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई अगले साल 22 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी।

सुब्रमण्यम स्वामी चाहते हैं कि देश में भविष्य में होने वाले चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ ही पेपर ट्रेल लगाने और प्रत्येक मतदाता को कागज की रसीद देने का निर्देश निर्वाचन आयोग को दिया जाये।

इससे पहले, न्यायालय सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने के लिए तैयार हो गया था। स्वामी का आरोप है कि ईवीएम छेड़छाड़ रहित नहीं है और इसलिए वह चाहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ कागज का प्रिंट लेने या पुरानी मतपत्र की व्यवस्था शुरू की जाये।

व्यक्तिगत रूप से बहस करते हुए स्वामी ने फिर से मतपत्र व्यवस्था शुरू करने की दलील दी और कहा कि अमेरिका और जापान जैसे देशों ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन प्रणाली को अब ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि इस समय दुनिया में सिर्फ निजी कंपनियों ही इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का निर्माण कर रही हैं और इनके साथ छेड़छाड़ की जा सकती है।

 

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