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कागजी प्रक्रिया में फंसा ऑस्ट्रेलियाई कुत्ता

अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन से ऑस्ट्रेलिया से लाया गया एक कुत्ता प्रक्रियागत झमेले में फंस गया है और उचित कागजात नहीं होने के कारण एक महीने से अधिक समय से उसे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सीमाशुल्क विभाग के गोदाम में रखा गया है।

ग्रेहाउन्ड नस्ल का कुत्ता छोड़े जाने के लिए कृषि विभाग के तहत पशुधन एवं मत्स्यिकी विभाग से एनिमल क्वारंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विसेज (एक्यूसीएस) से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने की प्रतीक्षा कर रहा है।

डेल्ही इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) के अधिकारी के अनुसार कुत्ता को मलेशियन एयरलाइंस से ऑस्ट्रेलिया से लाया गया और उसे यहां जे एस सिद्धू को सौंपा जाना था जिसने उसे आवारा छोड़ दिया।

अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि बिना एनओसी के और मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पशु को लाने के लिए एयरलाइन को पत्र भेजा गया।

इस बीच कुत्ते की अग्नि परीक्षा अब खत्म होने जा रही है क्योंकि डायल अधिकारियों ने कहा है कि वे जल्द ही इसे पशुओं के लिये काम करने वाली कार्यकर्ता और सांसद मेनका गांधी को सौंपने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, उन्होंने आस्ट्रेलिया से भेजने वाले और भारत में उसे हासिल करने वाले का ब्योरा नहीं दिया।

मलेशियन एयरलाइंस से संपर्क करने की कोशिशें बेकार गईं। दिल्ली हवाई अडडे पर जब एयरलाइंस के टर्मिनल मैनेजर धीरज वाधवा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।

अधिकारियों के अनुसार कुत्ता को एक नवंबर को भारत भेजा गया था और तब से उसे पिंजरे में रखा गया है। मानदंडों के अनुसार किसी व्यक्ति को पशु का आयात करने से पहले एक्यूसीएस से एनओसी लेना होता है। इसके अतिरिक्त पशु प्रमाणपत्र और यहां पहुंचने पर पशु के टीकाकरण का रिकार्ड पेश करना होता है।

इस बीच पशुओं की अधिकारों के लिये काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था पेटा ने कहा है कि वह इस कुत्ते की मदद के लिये दिल्ली के फ्रेंडिकोइस एंड वाइल्डलाइफ एसओएस के साथ मिलकर काम कर रही है।

पेटा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पूर्वा जोशिपूरे ने कहा कि जो व्यक्ति जानवरों को विदेश से ला रहा है, यह उसकी जिम्मेदारी है कि वह सभी कानूनी दिशा निर्देशों को जाने। साथ ही हवाई अड्डा प्राधिकरण की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह तुरंत पशुओं का संरक्षण करने वाले स्थानीय संगठनों से संपर्क करे ताकि कुत्ते को किसी को देखरेख के लिये दिया जा सके।

पूर्वा ने प्राधिकरण से अपील की कि वह कुत्ते को तुरंत छोड़े और उसे देखरेख के लिये किसी गैर सरकारी संगठन को सौंप दे।

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