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परीक्षा से पहले आई मार्कशीट से सहमे छात्र

खामी के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नहीं मांगी माफी

दिल्ली विश्वविद्यालय में मई के पहले सप्ताह में परीक्षाएं शुरू होनी हैं, लेकिन इसके ऐन पहले आई मार्कशीट ने छात्रों के होश उड़ा दिए। कई छात्रों को गुरुवार देर रात तक इस बात की जानकारी नहीं हो पाई कि बाद में आई उनकी मार्कशीट गलत है।

खालसा कॉलेज के शिक्षक सैकत घोष का कहना है कि विश्वविद्यालय की इस गलती की वजह से गुरुवार को सुबह कॉलेज आए छात्र काफी परेशान थे। कई छात्र इसकी वजह से सो तक नहीं पाए थे। वहीं विश्वविद्यालय ने इस गड़बड़ी के लिए माफी भी नहीं मांगी। डीयू छात्र अतुल ने बताया कि गरुवार को डीयू के विभिन्न कॉलेजों के करीब सौ छात्रों ने वाइसचांसलर कार्यालय जाकर अपनी बात रखी। प्रशासन ने गलती मानते हुए पहले के परिणाम को सही ठहराया। विवि प्रशासन के अनुसार गलत लिंक के कारण ऐसी घटना हुई है। अतुल ने बताया कि अभी दस दिन बाद छात्रों की सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू होने वाली है। ऐसे में इस तरह के दबाव से से छात्रों को बहुत नुकसान हुआ है।

मिरांडा हाऊस की शिक्षिका आभा देव हबीब ने बताया कि रिजल्ट देखने के बाद शिक्षक और छात्र पूरे दिन परेशान रहे। जबकि कुछ ही दिनों में छात्रों की परीक्षाएं शुरू होने वाली है। विवि के प्राय: सभी कॉलेज के सभी विषयों के पहले और तीसरे सेमेस्टर के रिजल्ट में इस तरह की गड़बड़ी थी। इनमें खालसा, किरोड़ीमल, मिरांडा हाउस, हिंदू, सेंट स्टीफंस सहित विवि के कई अन्य कॉलेजों के छात्र शामिल थे।

वहीं डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) ने आनन-फानन में सेमेस्टर सिस्टम लागू किए जाने को इस अव्यवस्था के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया है। डीटीएफ सचिव राजीव कंवर का कहना है कि विवि प्रशासन के अड़ियल रवैये के कारण छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा। डीटीएफ ने कहा है कि विवि प्रशासन को असंवेदनशील कार्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। कमला नेहरु कॉलेज की शिक्षिका सनम खन्ना का कहना है कि कई छात्रों के 10 से 15 अंक कम थे। छात्र असमंजस में थे कि नंबर में बदलाव कैसे हुआ। वहीं कॉलेज के पास इस बात की जानकारी न होने की वजह से छात्रों को समझा पाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा कि छात्रों को अभी तक पहले सेमेस्टर की मार्कशीट नहीं मिली है।

किरोड़ीमल कॉलेज के छात्र अंकुर दहिया का कहना था कि उन्हें अभी तक नई मार्कशीट नहीं मिली है ऐसे में मेरे पास इस बात का प्रमाण नहीं था कि मेरे पहले आए अधिक अंक सही है या नहीं। मैं दुविधा में रहा कि दिसंबर में आए अंक सही है या फिर अप्रैल में बुधवार को आया परिणाम।

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