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हिन्दुस्तान की जान है दिल्ली

महाभारत के युधिष्ठिर यानी गजेन्द्र चौहान दिल्ली के रहने वाले हैं। पटेल नगर के शादी खामपुर गांव के चौहान फिल्मों में लगातार काम कर रहे हैं। करियर के लिए मुंबई में भी आशियाना बना चुके चौहान को अपनी मातृभूमि इस कदर आकर्षित करती है कि वे पूरा समय दिल्ली में बिताने के लिए बेचैन रहते हैं। दिल्ली के बारे में उनसे सत्य सिंधु की बातचीत

आप अपनी दिल्ली के बारे में बताएं।
हिन्दुस्तान के सर्वश्रेष्ठ शहरों में से एक है हमारी दिल्ली। इसके दो कारण हैं। एक तो मेरा जन्म दिल्ली में हुआ है, जहां मैंने चलना, पढ़ना, खेलना और प्रतियोगिता में सफल होना सीखा। दूसरा, दिल्ली हर तरह से खूबसूरत है भी। यह ऐतिहासिक शहर तो है ही, देश की राजधानी होने के कारण दुनियाभर के लिए आकर्षण का केन्द्र भी है। मैं अभिनेता हूं, इसलिए मुंबई में भी रहना पड़ता है, एक ठिकाना बनाया हुआ है, लेकिन मेरी पूरी दुनिया आज भी दिल्ली में ही है।

यहां की ऐसी बातें जिन पर आप गर्व महसूस करते हैं?
बचपन की यादें बहुत हैं। वे शरारतें जो दिल्ली के पटेल नगर क्षेत्र में स्थित खामपुर गांव में करता था। आज भी हमेशा दिल्ली में आता रहता हूं और दोस्तों के साथ मस्ती होती रहती है। दिल्ली में एक पंजाबी कल्चर है, जिसमें खूब मस्ती है और लजीज भोजन भी। ये सारी चीजें मुझे बहुत पसंद हैं और इन पर गर्व करता हूं। दिल्ली में सारे मौसम का स्वाद है और महानगर होने के कारण दिल्ली में हर तरह की संस्कृति है जो इस शहर को सम्पूर्णता प्रदान करती है। मैं कह सकता हूं कि हिन्दुस्तान की जान है यह शहर।

तब की और आज की दिल्ली में क्या-क्या बदलाव महसूस करते हैं?
दिल्ली अब काफी बदल चुकी है। यहां की लाइफ काफी फास्ट हो गई है और व्यावसायिकता बढ़ गई है। शिक्षण संस्थान काफी बढ़ गए हैं, सड़कें काफी अच्छी हो गई हैं। मेट्रो ने जीवन को काफी आसान बना दिया है और काफी संख्या में फ्लाई ओवर्स भी बन गए हैं। ये सारे परिवर्तन दिल्ली के चेहरे पर स्पष्ट दिखते हैं और दिल्ली को अन्तरराष्ट्रीय स्तर के बेहतरीन शहरों में शामिल कराते हैं।

और सांस्कृतिक माहौल में क्या परिवर्तन पाते हैं?
दिल्ली सांस्कृतिक राजधानी तो बन ही गई है, जहां काफी उन्नत तकनीक वाले नाटक भी होते हैं और नियमित रूप से दजर्नों सांस्कृतिक कार्यक्रम होते रहते हैं। अब तो यहां फिल्म इंडस्ट्री भी डेवलप हो रही है। मुंबई में अधिकतर कलाकार उत्तर भारत के हैं। मैं भी मुंबई पूरी तरह छोड़ सकता है, अगर दिल्ली में काफी काम होने लग जाए। यहां व्यावसायिकता बढ़ी तो है, उसमें और वृद्धि की जरूरत है। दिल्ली में लोग दोस्ती को दोस्ती मानते हैं, उसके बीच बिजनेस को नहीं लाते। लेकिन मुंबई में लोग दोस्ती भी करते हैं तो बिजनेस के लिए। दिल्ली की दोस्ती वाली संस्कृति अपनी जगह अच्छी है, लेकिन बिजनेस भी जरूरी है।

यहां की कौन-सी बातें पसंद नहीं हैं?
यहां का अव्यावसायिक नजरिया मुझे अच्छा नहीं लगता। मुंबई में फोन पर सालों तक बात चलती रहती है और काम चलता रहता है, लेकिन दिल्ली में संबंध ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। फोन की बातचीत से बात पूरी नहीं मानी जाती, मिलना जरूरी होता है। इस सोच में थोड़े परिवर्तन की जरूरत है, ताकि बचे हुए समय का सदुपयोग हो सके। दिल्ली में बाल मजदूर के मामले में भी जागरूकता की जरूरत है।

यहां खाने की कौन-कौन सी जगहें पसंद हैं और क्यों?
खाने-पीने के लिए दिल्ली बेजोड़ शहर है। मुझे खाने का शौक भी रहा है। मैं शाकाहारी हूं। छोटे भठूरे खाने के लिए मैं कनॉट प्लेस के काके दी हट्टी में पहुंच जाता था। पानी पूरी खाने के लिए हॉज खास मार्केट जाता रहता हूं। जब पढ़ता था तो मेरे काफी दोस्त पुरानी दिल्ली के थे। किरोड़ीमल कॉलेज में पढ़ता था और लौटते हुए दोस्तों के साथ पुरानी दिल्ली पहुंच जाता था। वहां कुल्फी-फालूदा और ब्रेड पकौड़े खाने में बड़ा मजा आता था। बाहर थाली खाने का मूड बनता है तो घर के पास ही नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में बीकानेरवाला में पहुंच जाता हूं।

यहां की किन-किन जगहों को आप मिस करते हैं?
मैं सबसे ज्यादा मिस करता हूं अपने स्कूल को। आनन्द पर्वत पर स्थित है रामजस स्कूल नम्बर-2, जहां से मैंने 11वीं तक की पढ़ाई की है। वहां अब चाह कर भी नहीं जा पाता। शायद किसी विशेष अवसर पर जाना हो पाए। अगर ऐसा मौका मिल जाए तो मजा आ जाए।

आपकी पूरी दिनचर्या क्या होती है?
मैं सुबह 6 बजे बिछावन छोड़ देता हूं और बीच पर टहलने चला जाता हूं। मुझे दो दफ्तरों में बैठना पड़ता है। एक तो अपना दफ्तर है और दूसरा आर्टिस्ट एसोसिएशन का, जहां मैं उपाध्यक्ष हूं। जहां ज्यादा जरूरी होता है, वहां जाता हूं लेकिन 9 बजे तक दफ्तर पहुंच जाता हूं। नाश्ते में सिर्फ फ्रूट्स लेता हूं और लंच घर से लेकर जाता हूं, जिसमें दाल, सब्जी, दही और दो चपाती होती है। मैं चावल और आलू कभी नहीं खाता ताकि वेट कंट्रोल रहे। आमतौर पर महीने में 20-22 दिन शूटिंग पर रहता हूं, जिस दौरान घर आने का कोई निश्चित समय नहीं बन पाता। रात में घर आकर डिनर में सिर्फ ब्राउन ब्रेड और सूप लेता हूं।

फुरसत में क्या करना पसंद करते हैं?
मेरे दो शौक हैं, संगीत सुनना और टेलीविजन पर समाचार देखना। टेनिस देखना भी पसंद है। शाम को समय मिलता है तो टेबल टेनिस खेलता भी हूं।

आपके लिए सफलता क्या है?
मेरे लिए सफलता एक सुखी और सरल जीवन है, जिसमें जीवन की बुनियादी चीजें मिल जाएं। लग्जरी की कोई सीमा नहीं होती। मुङो देश ने बहत कुछ दिया है। मैं अब इतना ही चाहता हूं कि देश के लिए कुछ कर पाऊं।

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