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बसपा नेता मनोज का पीएसओ गिरफ्तार

मसूरी से बसपा प्रत्याशी मनोज शर्मा पर हमले के मामले में पुलिस ने उनके पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी अफसर) को गिरफ्तार किया है। मनोज पर मसूरी रोड स्थित कोल्हूखेत के पास एक गेस्ट हाउस के बाहर बुधवार रात फायर किए गए थे। आरोप है कि मनोज के दोस्त ललित यादव ने पीएसओ रवि मलिक की लाइसेंसी पिस्टल से इस वारदात को अंजाम दिया था। ललित फरार चल रहा है।


शुक्रवार को कांवली रोड से पुलिस ने मनोज शर्मा के पीएसओ रवि मलिक पुत्र ब्रह्म सिंह मलिक को गिरफ्तार किया। प्रेमनगर स्थित 7 जनरल विंग निवासी रवि मलिक सेना की 10 गार्डस मैकेनिकल यूनिट से जुलाई 2011 में रिटायर्ड हुआ था। एसएसपी जीएन गोस्वामी ने पत्रकारों से वार्ता में  घटना का खुलासा करते हुए कहा कि 29 दिसंबर की शाम रवि मलिक और ललित यादव ने मनोज शर्मा के दफ्तर के बाहर कार में शराब पी। मनोज शर्मा के महिला मित्र के साथ मसूरी की ओर निकलने पर दोनों पीछा करने लगे।
एसएसपी के अनुसार मनोज कोल्हूखेत के गेस्ट हाउस पर पहुंचे, लेकिन ताला नहीं खुलने पर महिला मित्र के साथ वापस लौटने लगे। तभी ललित यादव ने रवि मलिक के लाइसेंसी पिस्टल से उन पर हमला कर दिया। घटना के बाद ललित व रवि मौके से फरार हो गए। हरिद्वार होते हुए दोनों मेरठ-मुजफ्फरनगर हाईवे स्थित एक ढाबे पर पहुंचे। यहां ललित ने रवि को कार से उतार दिया। रवि वहां से मेरठ पहुंचा। दोस्त के यहां रुकने के बाद दून लौट आया। पुलिस ने रवि के खिलाफ 30 आर्म्स एक्ट के साथ ही हत्या के प्रयास और षडय़ंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसको गिरफ्तार कर लिया।

दो महीने से पीएसओ
रवि चुनाव से ठीक पहले मनोज शर्मा का पर्सनल सिक्योरिटी अफसर बना। चुनाव के दौरान वह हर वक्त मनोज के साथ रहा। 29 फरवरी की दोपहर साढ़े 12 बजे मनोज से मिलने जाखन स्थित दफ्तर पहुंचा। करीब ढाई घंटे बाद मनोज से मुलाकात हो पाई। मनोज ने उससे मतगणना की तैयारियों पर चर्चा की।  एजेंट बनाने के लिए फोटो और आईडी प्रूफ लेकर उसका फार्म भी भरा।

एनएसजी कमांडो था रवि
सेना की नौकरी के दौरान रवि मलिक एनएसजी में पांच साल तक कमांडो रहा। 10 गार्डस मैकेनिकल यूनिट से जुलाई 2011 में रिटायर्ड हुआ। रवि का लाइसेंस 1999 ऊधमपुर(जम्मू-कश्मीर) का बना हुआ है। उसने छह महीने पहले .32 बोर का पिस्टल आर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर से खरीदा। रवि से बरामद शस्त्र लाइसेंस की जांच के लिए पुलिस ने जम्मू पुलिस व प्रशासन से मदद मांगी है।

मोबाइल लोकेशन से पकड़ा गया
घटना के बाद से पुलिस ललित की मोबाइल लोकेशन के साथ ही कॉल डिटेल खंगाल रही थी। 29 फरवरी को ललित ने एक भी बार मनोज को कॉल नहीं की। घटना वाले दिन जाखन स्थित दफ्तर में मुलाकात करने वालों में रवि का नाम सामने आने के बाद से पुलिस उसके मोबाइल की लोकेशन भी ट्रेस कर रही थी। दोनों की लोकेशन शाम चार बजे से गुरुवार सुबह तक एक साथ मिली, जिस पर पुलिस ने रवि की तलाश शुरू की।

शराब के सुरूर का बहाना
रवि पूरी घटना से अनजान बना है। उसका कहना है कि मनोज शर्मा से मुलाकात के बाद उसे काले रंग की सेंट्रो कार में बैठाकर ललित ने शराब पिलाई। मनोज के दफ्तर के बाहर कार में उसने करीब ढाई घंटे तक शराब पी, जिससे उसे नशा चढ़ गया और फिर उसे हरिद्वार में होश आया। जहां उसे ललित ने कहा कि वह जरूरी काम से मुजफ्फरनगर जा रहा है। रास्ते में एक ढाबे में पानी पीने के लिए रुकने के दौरान ललित कार लेकर निकल गया।

खुड़बुड़ा की है महिला मित्र
घटना के वक्त स्कार्पियो में मनोज के साथ खुड़बुड़ा निवासी उनकी महिला मित्र थी। एसएसपी के अनुसार ड्राइवर और गनर को छोड़कर दफ्तर से निकले मनोज का कुछ दूरी पर महिला मित्र इंतजार कर रही थी। दोनों गेस्ट हाउस के गेट तक पहुंचे। यहां चौकीदार नहीं मिला। मनोज ने गेस्ट हाउस खुलवाने के लिए फोन किया। चौकीदार वहां नहीं था। जिस पर दोनों पांच मिनट रुककर कार की ओर पैदल लौटने लगे, तभी उन पर हमला हो गया।

गवाहों की सुरक्षा का दावा
मामले से जुड़े अहम गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। मनोज की महिला मित्र के साथ ही कार से दून हॉस्पिटल लाने वाला युवक इस घटना में अहम गवाह हो सकते हैं। एसएसपी गोस्वामी ने कहा कि मनोज के साथ गई महिला और उनको कार से दून हॉस्पिटल पहुंचाने वाले युवक की पहचान को गोपनीय रखा जा रहा है। दोनों इस मामले में अहम कड़ी हैं।

कुछ घंटे या कुछ दिन
एसएसपी गोस्वामी का कहना है कि ललित यादव की गिरफ्तारी को लेकर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। पुलिस अपराधी के काफी करीब है। इसमें कुछ घंटे भी लग सकते हैं या फिर कुछ दिन का इंतजार भी करना पड़ सकता है। पुलिस को ललित के छिपे होने के संभावित ठिकानों के बारे में ठोस जानकारियां मिली हैं। पुलिस इन स्थानों पर दबिश दे रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश गई टीमों के साथ ही एसओजी और एसटीएफ की टीमें ललित यादव के मूवमेंट पर नजर रख रही हैं।

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