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सिनेमैटोग्राफर: विजुअल का माहिर

सिनेमैटोग्राफर फिल्म प्रोडक्शन, टेलीविजन और ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शन जैसे विभिन्न माध्यमों के लिए काम करते हैं। सिनेमैटोग्राफर बनने की ख्वाहिश रखने वाले युवा प्राय: जाने-माने सिनेमैटोग्राफर के असिस्टेंट कैमरापर्सन के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते हैं।

डायरेक्टर के आइडियाज को विजुअल के माध्यम से रुपहले परदे पर उतारने का काम कोई और नहीं, बल्कि सिनेमैटोग्राफर करता है। सिनेमैटोग्राफर अर्थात चलचित्रकार दृश्य-विधान के माहिर कलाकार होते हैं। विषय को सही तरीके से प्रस्तुत करने में विजुअल्स की अहम भूमिका होती है और सिनेमैटोग्राफर विजुअल्स के जरिए डायरेक्टर के विजन को जीवंत दृश्य के रूप में पेश करता है। वह एक साथ कई जिम्मेदारी निभाता है। इमेज कैप्चरिंग, कंपोजिशन, सेट की लाइटिंग, कैमरा मूवमेंट्स (जिसकी स्मूथनेस से कट्स का निर्णय लिया जाता है) और फिल्म की विजुअल स्टालिंग, हर कार्य का दायित्व सिनेमैटोग्राफर पर होता है।

सिनेमैटोग्राफर फिल्म प्रोडक्शन (इसमें फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंटरी, एडवरटाइजिंग आदि शामिल हैं), टेलीविजन और ब्रॉडकास्ट प्रोडक्शन जैसे विभिन्न माध्यमों के लिए काम करते हैं। सिनेमैटोग्राफर बनने की ख्वाहिश रखने वाले युवा प्राय: किसी जाने-माने सिनेमैटोग्राफर के असिस्टेंट कैमरापर्सन के रूप में अपने करियर की शुरुआत करते हैं। वे डायरेक्टर के इरादों के मुताबिक दृश्य की मांग को ध्यान में रखते हुए फिल्म स्टॉक, लेंस, फिल्टर्स आदि को सेलेक्ट करते हैं।

सिनेमैटोग्राफर्स और डायरेक्टर्स के बीच संबंध हमेशा एक जैसा नहीं होता, कुछ ऐसे भी उदाहरण देखने को मिलते हैं, जहां डायरेक्टर की ओर से सिनेमैटोग्राफर को पूरी आजादी रहती है तो कुछ मामलों में डायरेक्टर जो कहता है, वही करना पड़ता है।

कमाई
इस प्रोफेशन में करियर की शुरुआत में ज्यादा पैसे कमाने की उम्मीद नहीं की जा सकती। शुरू के कुछ साल तो सीखने में ही बीत जाते हैं, क्योंकि उस समय सीखना ज्यादा महत्व रखता है।
 
सिनेमैटोग्राफर का मेहनताना फिल्म के बजट से तय होता है, इसलिए हर फिल्म के लिए एक निश्चित पारिश्रमिक तय होना मुश्किल है। हालांकि उनको एक फीचर फिल्म के लिए तकरीबन 10 लाख से 30 लाख रुपए तक मिलते हैं। दैनिक पारिश्रमिक के तौर पर भी एक सिनेमैटोग्राफर को 10 हजार से 50 हजार रुपये दिये जाते हैं। नामी-गिरामी सिनेमैटोग्राफर्स तो एक फिल्म के लिए 50 लाख से 70 लाख रुपये लेते हैं। जब आप एक असिस्टेंट के रूप में काम करना शुरू करेंगे तो आपको रोजाना 750 रुपये तो जरूर मिलेंगे और इसी प्रकार जब आपकी तरक्की सीनियर असिस्टेंट के रूप में होगी तो 2000 रुपये तक रोजाना पा सकते हैं। दिक्कत यह है कि आपको शुरू में कुछ भी नहीं मिल सकता, लेकिन धीरे-धीरे आप हर दिन करीब एक हजार रुपये तक कमा सकते हैं।
 
कैसे करें मुकाम हासिल
तस्वीरों का अध्ययन करने के लिए सौंदर्यशास्त्र को जानना और समझना जरूरी है। आर्किटेक्चर, लाइटिंग, फ्रेमिंग, कलर, कंट्रास्ट और टोन का निरीक्षण जरूरी है। फिल्म इंस्टीटय़ूट से सिनेमैटोग्राफी में डिप्लोमा कोर्स करने से आपको अपनी स्किल्स को संवारने में मदद मिलेगी। कुछ शॉर्ट टर्म कोर्स भी हैं, जिन्हें करना लाभकारी साबित होता है। सैद्धांतिक जानकारी के अलावा व्यावहारिक ज्ञान भी जरूरी है। अध्ययन से काफी लाभ मिलता है।

संस्थान

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीटय़ूट ऑफ इंडिया, पुणे
वेबसाइट
: http://www.ftiindia.com

चेन्नई फिल्म इंडस्ट्रियल स्कूल
वेबसाइट:
http://www.chennaifilmschool.org/cfs_facilities.htm

माइंडस्क्रीन फिल्म इंस्टीटय़ूट, चेन्नई
वेबसाइट:
http://www.mindscreen.co.in

पक्ष-विपक्ष
काम काफी संतोषप्रद है
इमेजेज को कैप्चर करना और विजुअल्स को क्रिएट करना काफी दिलचस्प और सृजनात्मक संतोष प्रदान करता है।
यहां आप आकर्षक कमाई कर सकते हैं। साथ ही आपका जीवन ग्लैमर से भरपूर होगा। मुश्किल यह है कि जितना यह जीवन सुनहरा है, उतना ही अस्थिर।
सिर्फ अपनी क्रिएटिव एक्सिलेंस की बदौलत यहां कोई सरवाइव कर सकता है। आपके पास कोई तभी आएगा, जब आप औरों से बेहतर कुछ करने की क्षमता रखते हों।
जॉब सिक्योरिटी नहीं है, जीवन नीरस बना रहता है।

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