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भ्रष्टाचार के मामले में बैंक मैनेजर को 7 साल कैद

सीबीआई की विशेष अदालत ने बैंक मैनेजर को भ्रष्टाचार के मामले में सात साल की कैद की सजा सुनाई। अदालत ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी अधिनियम में भी मैनेजर को दोषी करार देते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। दोनों सजा साथ साथ चलेगी। वहीं कुल 66 हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है।
    
सीबीआई के लोक अभियोजक बीके सिंह ने बताया कि नोएडा सेक्टर 18 स्थित कारपोरेशन बैंक के सहायक महाप्रबंधक गोपीकृष्ण ने सीबीआई से शिकायत की थी कि बैंक मैनेजर रवि चंद्रा ने बैंक की सेक्टर 18 स्थित एसएसआई शाखा में तैनाती के दौरान 10,84,600 रुपये का घोटाला किया है।
    
सीबीआई ने इस मामले में 27 मई 2005 को सीबीआई की अदालत में मैनेजर के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि रवि चंद्रा ने वर्ष 2003-05 में तैनाती के दौरान 10,84,600 रुपये का घोटाला किया। उन्होंने बताया कि 3,61,000 रुपये उसने एक ग्राहक से बैक ड्राफ्ट बनाने की एवज में लिए। उसने बैंक ड्राफ्ट तो बना दिया, लेकिन नकदी बैंक में जमा नहीं कराई। इसी तरह उसने एक ग्राहक के चेक पर फर्जी हस्ताक्षर कर 4,50,000 रुपये निकाल लिए। इसके अलावा उसने एटीएम से छेड़छाड़ कर कई बार रुपये निकाले।

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