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संगीत लहरियों पर थिरकन ने सभी का मन मोह लिया

नृत्य-संगीत का अद्भुत समां पिछले दिनों लगातार तीन दिन तक बंधा एलिएंस फ्रैंकाइज ऑडिटोरियम में। हिन्दी संगीत इंस्टीट्यूशन द्वारा भातखंडे संगीत विद्यालय की 72वीं वर्षगांठ पर जश्न के रूप में चला म्यूजिक फेस्टिवल। इस म्यूजिक फेस्टिवल में बच्चों-बड़ों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और प्रस्तुत की अपने हुनर की बानगी।
भारतीय नृत्य-संगीत को विदेशियों द्वारा हमेशा से ही बहुत सराहा जाता रहा है। कुछ विदेशी तो ऑडिटोरियम में बैठे-बैठे ही नृत्य की मुद्राएं बनाते हुए उस संगीतमय शाम में ही कुछ सीख कर जाना चाहते थे। कार्यक्रम में जानी-मानी हस्तियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। प्रसिद्ध नृत्यांगना पद्ममश्री गुरु गीता चंद्रन व पद्ममश्री गुरु सरोजा वैद्यनाथन की भरतनाट्यम की प्रस्तुतियां विशेष रहीं। दोनों नृत्यांगनाओं ने अलग-अलग दिन नृत्य प्रस्तुत किया और ऐसा लगा जैसे सभी देवियां स्टेज पर उतर आई हैं, कभी शिव नगरी, कभी वृंदावन कन्हैया के प्रांगण में तो कभी द्रौपदी के चीर-हरण का जीवंत चित्रण पेश करते हुए। फेस्टिवल के दूसरे दिन विद्यालय के शिष्यों ने अपनी-अपनी कला के अनमोल नमूने पेश किए। छोटे-छोटे कदम तेजी से थिरके तो कन्या के कोमल हाथों ने कभी तबले पर मधुर थाप दी। कार्यक्रम को रोचकता प्रदान करती रहीं अलग-अलग प्रस्तुतियां—भारत नाट्यम, शास्त्रीय गायन, भजन, शबद, वाद्य-यंत्रों पर मधुर संगीत, गजल, तबला वादन, ठुमरी-दादरा, लोक-नृत्य आदि। भाव, राग, ताल, गायन, नृत्य का अद्भुत संगम दर्शकों को मंत्र-मुग्ध करता रहा। विद्यालय के प्राचार्य व कार्यक्रम के निदेशक विनोद कुमार ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए संगीत आकांक्षाओं का प्रतीक है। समय-समय पर होने वाले इस तरह के कार्यक्रम संगीत-प्रेमियों के लिए एक अलग ही एनर्जी लेकर आते हैं, जो उन्हें दिनों-दिन ताजगी भरी अद्भुत शक्ति प्रदान करते हैं। 

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