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सुधार में कमी से दूसरी सांस्कृतिक क्रांति का खतरा: वेन

चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कम्यूनिस्ट शासन वाले इस देश में राजनीतिक सुधारों की जमकर वकालत की है और आगाह किया कि ढांचागत सुधारों में नाकाम रहने पर एक और सांस्कृतिक क्रांति का खतरा पैदा हो सकता है।
   
कम्यूनिस्ट नेतृत्व में राजनीतिक सुधारों के तरफदार के तौर पर मशहूर वेन ने अपने आखिरी सालाना संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश के शासन में सुधार के लिए ढांचागत राजनीतिक सुधारों में तेजी लाए जाने की जरुरत है।
   
तकरीबन एक दशक तक प्रधानमंत्री रहने के बाद इस साल के अंत में अपना पद छोड़ने जा रहे वेन ने कहा कि चीन में सुधार एक महत्वपूर्ण चरण में आ चुका है। उन्होंने कहा कामयाब सियासी सुधार के बगैर आर्थिक मोर्चे पर ढांचागत सुधार करना हमारे लिए नामुमकिन है और इससे हम उन फायदों को भी गंवा सकते हैं जो हमने इस क्षेत्र में पाए हैं।
   
बेबाकी से दिए गए अपने बयान में वेन ने माओ त्से तुंग की सांस्कतिक क्रांति की याद दिलायी जिसने देश को कमोबेश पंगु बना दिया था। वेन ने माओ की इस क्रांति को ऐतिहासिक त्रासदी करार दिया।
   
वेन ने कहा साल 1976 में चार लोगों के गिरोह (माओ की पत्नी और उनके समर्थकों) पर गाज गिराने के बाद हमारी पार्टी ने कई ऐतिहासिक मुद्दों पर प्रस्ताव को अपनाया और चीन में सुधार की बाबत कई अहम फैसले किए।
   
उन्होंने कहा कि बहरहाल, सांस्कृतिक क्रांति की गलती और सामंतवाद का असर अब भी पूरी तरह खत्म किया जाना बाकी है।

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