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शोषण और तस्करी के शिकार होते हैं लापता बच्चे

एक गैर सरकारी संगठन की रिपोर्ट के अनुसार देश में हर घंटे करीब 11 बच्चे लापता हो जाते हैं। इनमे से अधिकतर बच्चों की तस्करी कर उन्हें बंधुआ मजदूरी, व्यवसायिक यौन शोषण और मादक पदार्थों के धंधे में लगा दिया जाता है।
   
बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) एनजीओ के अनुसार जनवरी 2008 से जनवरी 2010 के बीच देश भर के 392 जिलों से 1,17,480 बच्चे लापता हुए। ये आंकड़े सरकारी एजेंसियों से प्राप्त किए गए हैं। बीबीए ने अपनी किताब, मिसिंग चिल्ड्रेन ऑफ इंडिया में कहा है कि इसने ये आंकड़ें 392 जिलों में आरटीआई दायर कर हासिल किए हैं।
   
इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआसी) के महानिदेशक सुनील कृष्ण ने कहा कि पुलिस और कानूनी एजेंसियां इन मामलों को गंभीरता से नहीं लेतीं। लापता होने वाले बच्चों से संबंधित आंकड़े इकठ्ठा करने और बांटने वाली एजेंसियां ना के बराबर है। बीबीए ने अपनी एक वेबसाइट भी शुरू की है जहां इन बच्चों से संबंधित आंकड़े प्राप्त किए जा सकते हैं।

2004-05 में एनएचआरसी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि हर साल लगभग 44,000 बच्चों लापता हो जाते हें जिनमें से एक चौथाई बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलता। पिछले सात सालों में इस संख्या में 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बीबीए के अनुसार पिछले पांच सालों में लापता होने वाले बच्चे जो अभी तक नहीं मिले हैं, उनकी संख्या 30 प्रतिशत बढ़ गयी है।
   
रिपोर्ट के अनुसार अगर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हर जिले से लापता होने वाले बच्चों की औसत 150 बच्चों की संख्या को 640 जिलों के साथ जोड़ा जाए तो हर साल लापता होने वाले बच्चों की संख्या 96,000 हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार आरटीआई से पता चला है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों से 24,744 बच्चे लापता हैं। इन शहरों में दिल्ली सबसे उपर आती है जहां इन लापता बच्चों में से 12 प्रतिशत बच्चों की अभी तक कोई खोज खबर नहीं मिली है।
   
हर साल दिल्ली से लगभग 6,785 बच्चे लापता होते हैं जिसमें से 850 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिलता। लापता होने वाले बच्चों में से 89 प्रतिशत बच्चों अकेले दिल्ली और कोलकाता से आते हैं। 20 राज्यों और चार संघ शासित क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बच्चे महाराष्ट्र से लापता होते हैं। इनकी संख्या 26,211 है। महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल से 25,413, दिल्ली से 13,570 और मध्यप्रदेश से 12,777 बच्चे लापता होते हैं।
   
इस रिपोर्ट में बड़े शहरों में विस्थापित होकर आने वाले लोगों की दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है कि विस्थापित लोग जो झुग्गियों में रहते हैं और सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर हैं वो इसका सबसे ज्यादा शिकार बनते हैं और वैसे शहर या क्षेत्र जहां यातायात और संचार संपर्क अच्छा है वहां सबसे ज्यादा बच्चे लापता होते हैं। रिपोर्ट में इस समस्या के समाधान के लिए दिशा निर्देशन और सुझाव भी दिए गए हैं।

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  • Web Title:शोषण और तस्करी के शिकार होते हैं लापता बच्चे