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सारण की बेटियों के हौसलों में दम भरेंगी परमी

बिहार के सारण जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर मस्तीचक में रहमत बालिका विद्यालय का मैदान..। वक्त सुबह छह बजे..। नीली व पीली जर्सी में किशोरियां जब फुटबॉल पर किक मारती हैं, तो बड़े भी दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं।

हैं तो ये आसपास के गांवों के कम पढ़े-लिखे गरीबों के घरों की बेटियां मगर इनके जोश व जज्बे में कोई कमी नहीं है। ये रोजाना यहां करीब आठ बजे तक प्रैक्टिस करती हैं। फिर स्कूल जाती हैं या आई हॉस्पिटल में ट्रेनिंग लेती हैं। इनके हौसलों में दम भरने और जज्बे में जुनून का रंग भरने के लिए इंग्लैंड के न्यू कासल यूनाइटेड क्लब की मशहूर फुटबॉलर परमी झूटी 14 मार्च को आएंगी।

परमनी छह दिनों तक अपने संघर्षमय जीवन का अनुभव इन खिलाड़ियों के साथ बांटेंगी और फुटबॉल खेलने की बारीकियां सिखाएंगी। इसे लेकर ये किशोरियां बेहद उत्साहित हैं और उस पल का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।

अखंड ज्योति फुटबॉल एकेडमी में फुटबॉल का कौशल सीखने वाली इन किशोरियों में से तीन सुमंत सिंह, गुंजा तिवारी और पूजा राय का चयन पिछले साल भारतीय टीम के अंडर-13 में हुआ था। इस टीम को खेलने के लिए वियतनाम जाना था, पर इन किशोरियों के पास वीजा या पासपोर्ट नहीं होने से ये वियतनाम नहीं जा सकीं।

पिरारी गांव की 14 वर्षीया गुंजा तिवारी बताती है कि वियतनाम नहीं जाने को लेकर मायूसी जरूर हुई पर वह और उसकी अन्य साथी परमी झूटी के यहां आने के फैसले से काफी खुश हैं।

कौन हैं परमी झूटी
पहली प्रोफेशनल एशियाई महिला, जिन्होंने लंदन के फुटबॉल क्लब फुलहॉम, मिल्लवाल और चेल्सिया के लिए खेला। 29 वर्ष की अवस्था में गंभीर चोट लगने के बावजूद ठीक होने पर पहले जैसे ही जुनून के साथ खेलना शुरू किया।

परमी पर बन चुकी है फिल्म
2002 में बनी गुरिंदर चड्ढा निर्देशित फिल्म ‘बेंड इट लाइक बेखम’ ऐसी दो युवतियों की कहानी पर आधारित है, जो फुटबॉल से बेहद प्यार करती हैं पर दकियानूसी विचार के चलते उनके परिवार वाले इसका विरोध करते हैं। फिर भी वे जुनून के साथ खेलती हैं और अपने सपने पूरा करती हैं।

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