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चंद्रयान-2 में हो सकती है देरी

चंद्रयान-2 को चांद पर भेजने में देरी हो सकती है। यह वर्ष 2014 में प्रस्तावित था, लेकिन इसे तब तक इंतजार करना होगा जब तक भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन (इसरो) अपने दो भारी रॉकेट्स-भूसमकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण न कर ले।

स्वदेशी तकनीक से निर्मित राडार इमैजिंग सैटेलाइट-1 (रिसैट-1) के सफलतापूर्वक प्रक्षेपण के बाद इसरो के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने कहा कि हमने चंद्रयान-2 मिशन से पहले छह माह के अंतराल पर जीएसएलवी के दो रॉकेट्स के प्रक्षेपण की योजना बनाई है।

देश का पहला मानवरहित चांद मिशन चंद्रयान-1 वर्ष 2008 में चांद पर भेजा गया था। देश ने दूसरे चांद मिशन की योजना रूस के साथ मिलकर बनाई है।

इसरो की मुख्य चिंता जीएसएलवी रॉकेट को तैयार करना है, जो वर्ष 2010 में क्रायोजेनिक इंजन के घटक में खराबी आ जाने के कारण विफल हो गया था और जिसके कारण अंतरिक्ष एजेंसी की कई योजनाओं को झटका लगा।

राधाकृष्णन के अनुसार, अंतरिक्ष एजेंसी जीएसएलवी के लिए क्रायोजेनिक इंजन तैयार करने की प्रक्रिया में है। क्रायोजेनिक इंजन को परखने के लिए जमीन पर दो तरह के परीक्षण किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हम क्रायोजेनिक इंजन के साथ सितम्बर/अक्टूबर, 2012 में जीएसएलवी का प्रक्षेपण करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने इन आरोपों से इंकार किया कि अंतरिक्ष एजेंसी अपने लिए आवंटित अनुदानों का पूर्ण इस्तेमाल नहीं करती।

राधाकृष्णन ने कहा कि एजेंसी ने 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि 10वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान 13,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

उन्होंने हालांकि इससे सहमति जताई कि पिछले वर्ष में इसरो के लिए जितनी राशि आवंटित की गई थी, उतने का व्यय नहीं किया गया। रिसैट-1 पर आई लागत के बारे में उन्होंने कहा कि रॉकेट (ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएलवी) पर 110 करोड़ रुपये और सैटेलाइट पर 378 करोड़ रुपये का खर्च आया।

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