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जानें चंदा मामा को

चंदा मामा तो तुम्हें बहुत अच्छे लगते ही होंगे। रात में घर की छत पर खड़े होकर आसमान में तारों के बीच चमकते चंदा मामा हम सबका मन मोह लेते हैं। आओ, आज चंदा मामा के बारे में जानते हैं सत्य सिंधु से

रात के अंधेरे में दूधिया रोशनी बिखेर देने वाला चंदा मामा हम सबका मन मोहता रहा है। जब हम चंदा मामा के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते थे, तब इसके बारे में काफी कहानियां सुना करते थे, जो हमें खूब पसंद आती थीं। लेकिन अब तो हम चंदा मामा को करीब से देख चुके हैं। वैज्ञानिक चंदा मामा पर पहुंच भी चुके हैं और उसके बारे में ढेर सारी जानकारियां भी हासिल कर चुके हैं। तो आज हम जानते हैं कि वैज्ञानिक चंदा मामा के बारे में क्या कहते हैं?

चंदा मामा को हम कितने ही नामों से जानते हैं। चांद भी वही है, चंद्र भी उन्हीं का नाम है और चंद्रमा भी। तुम्हें तो पता ही है कि अंग्रेजी में इन्हें मून कहते हैं। यह पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है, जो हमेशा हमारी धरती के चक्कर लगाता रहता है। हमारे सौरमंडल में 60 चांद हैं, जो उपग्रह कहलाते हैं, लेकिन पृथ्वी का एक ही चांद है और वह है अपना चंदा मामा। पृथ्वी का वजन अपने चंदा मामा से 81 गुना अधिक है और चांद का आकार पृथ्वी के एक चौथाई के बराबर है। पृथ्वी से चांद की दूरी 3 लाख 84 हजार 400 किलोमीटर है। जिस तरह पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती रहती है, उसी तरह चांद पृथ्वी की परिक्रमा करता रहता है। वह 1 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है। पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करने में चांद को 27 दिन, 7 घंटे, 43 मिनट और 11 सेकेंड समय लगता है।

चांद पर न पानी है और न ही वायुमंडल, लेकिन यहां गुरुत्व बल है। यहां का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में 1/6 है। क्या तुम जानते हो कि सूर्य ग्रहण कैसे लगता है? जब चांद घूमता हुआ सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है तो कुछ पल के लिए यह सूर्य को पूरी तरह ढक देता है। इससे पृथ्वी पर अंधेरा छा जाता है। इसी को सूर्य ग्रहण कहते हैं।

जब वैज्ञानिकों ने चांद पर कदम रखा और शोध किए तो पता चला कि जिन क्षेत्रों को हम समुद्र समझते थे, वहां सूखा मैदान है। शायद तुमने कहीं पढ़ा भी होगा कि चांद पर बड़े-बड़े गड्ढे और ऊंचे-ऊंचे पर्वत हैं। इतनी जानकारी वैज्ञानिकों की ही खोज का नजीता है।

क्या तुम जानते हो कि 21 जुलाई, 1969 को जब नासा के अपोलो अभियान के तहत अपोलो 11, चांद पर उतरा था तो उसमें से तीन वैज्ञानिक नील ए आर्मस्ट्रांग, माइकल कॉलिन्स और एडविन ‘बज्ज’ ई एल्ड्रिन जूनियर चांद की धरती पर उतरे थे। उसके बाद 1972 तक 6 मानवयुक्त अंतरिक्ष यान चांद की धरती पर गये और वहां से चट्टान आदि के नमूने लेकर आये।

उन चट्टानों के नमूनों से यह भी पता चला कि चांद का जन्म लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले पृथ्वी की किसी विशाल टक्कर से हुआ था। अब तो चांद के बारे में ढेर सारी बातें मालूम हो गयी हैं न तुम्हें और यह भी जान लो कि वैज्ञानिक जल्द ही वहां इंसानों को ले जाने की भी योजना बनाने में लगे हैं। यानी कुछ समय बाद तुम भी चाहो तो चांद पर घूमने जा सकते हैं। लेकिन इस यात्रा में काफी रुपए लगेंगे। मम्मी-पापा से बात कर लेना।

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