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बजट सत्र के पहले चरण में पेश होगा लोकपाल विधेयक!

सरकार ने आज कहा कि संसद के मौजूदा बजट सत्र के पहले चरण में राज्यसभा में लोकपाल विधेयक पेश किया जाएगा ताकि इस पर पिछले सत्र में अधूरी रही चर्चा पूरी हो सके और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए एक मजबूत कानून बनाया जा सके।
  
प्रश्नकाल स्थगित कर लोकपाल विधेयक पर चर्चा कराने के लिए उच्च सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली द्वारा दिए गए नोटिस के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री पी के बंसल ने कहा कि पिछले सत्र में लोकपाल विधेयक पर बहस के दौरान सदस्यों ने 187 संशोधन पेश किये थे। उन्होंने कहा कि इन संशोधनों पर सरकार ने विचार किया है।
  
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र में 27 दिसंबर को लोकपाल विधेयक लोकसभा में पारित कर दिया गया था और राज्यसभा में 29 दिसंबर को इस पर चर्चा शुरू हुई थी। इसी दिन सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया और व्यवधान की वजह से लोकपाल विधेयक पर चर्चा पूरी नहीं हो सकी थी।
  
बंसल ने कहा बजट सत्र के पहले चरण में हम यह विधेयक चर्चा के लिए लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बजट सत्र में वित्त संबंधी विधेयकों को प्रधानता दी जाती है लेकिन इस सत्र की कार्य सूची में लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक सबसे उपर है। सरकार बजट सत्र के इसी चरण में आगे की चर्चा के लिए लोकपाल विधेयक पेश करना चाहती है।
  
संसद के बजट सत्र का पहला चरण 30 मार्च तक चलेगा। बंसल ने कहा कि इस चरण में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी और फिर रेल बजट तथा आम बजट पर चर्चा होगी और इन्हें मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद लोकपाल विधेयक पर चर्चा की जाएगी।
  
सदस्यों ने जानना चाहा कि विपक्ष और संप्रग के सहयोगी दलों द्वारा लोकपाल विधेयक पर दिए गए 187 संशोधनों का क्या हुआ। इस पर बंसल ने कहा सरकार ने इन सभी संशोधनों का अध्ययन किया है और हमने अपनी राय बनाई है।
  
उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार पेश किए गए संशोधनों पर विपक्षी सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर विधेयक पारित करना चाहती है।
  
इससे पहले, सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने नियम 257 का जिक्र करते हुए कहा कि 29 दिसंबर को सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने से पहले लोकपाल विधेयक पर चर्चा की जा रही थी लेकिन व्यवधान की वजह से चर्चा अधूरी रही थी। इसलिए इस सत्र में विधेयक पर चर्चा पुन: शुरू की जानी चाहिए।
  
बंसल ने जेटली से असहमति जताते हुए कहा और भी कई ऐसे विधेयक हैं जिन पर चर्चा अधूरी रह गई। बंसल ने कहा कि संशोधनों पर और विचार की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्षी दल विचारविमर्श के लिए तैयार हैं। इस पर जेटली ने कहा कि शीतकालीन सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद सरकार को कम से कम ढाई माह का समय मिला लेकिन लगता है कि सरकार को इस अवधि में विचारविमर्श की जरूरत महसूस नहीं हुई और बजट सत्र शुरू होने पर सरकार को यह जरूरी लगने लगा।
  
संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने दिसंबर में संसद के शीतकालीन सत्र की अवधि तीन दिन आगे बढ़ाई थी। उन्होंने कहा इसके बाद सरकार ने सत्र की अवधि और आगे बढ़ाने की मांग नहीं की इसलिए पीठासीन अधिकारी के पास सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।
  
मंत्री ने हालांकि इस बात पर सहमति जताई कि वह 29 दिसंबर की रात को सदन की अवधि बढ़ाने के लिए कह सकते थे। उन्होंने कहा लेकिन सदन की बैठक बुलाने का अधिकार सदस्य को नहीं होता। अगर राज्यसभा और लोकसभा के सभी सदस्य भी अनुरोध करें तब भी राष्ट्रपति सदन की बैठक नहीं बुलाएंगी। सदन की बैठक तब ही बुलाई जाएगी जब सरकार इसके लिए राष्ट्रपति को लिखेगी।
  
इससे पहले जेटली ने नियम 257 का हवाला देते हुए कहा कि इसके अनुसार, व्यवधान होने पर अगर सभापति को आवश्यक महसूस हो तो वह सदन की बैठक स्थगित कर सकता है लेकिन बहस स्थगित नहीं की जा सकती। सदन की बैठक शुरू होने पर बहस पुन: शुरू की जानी चाहिए।
  
उन्होंने कहा कि पिछले सत्र के समापन के दौरान राज्यसभा में लोकपाल विधेयक पर चर्चा की जा रही थी इसलिए इस सत्र में इस बहस को आगे बढ़ाया जाना चाहए। उन्होंने कहा कि सभापति को बताना चाहिए कि यह चर्चा कब बहाल होगी।
  
जेटली ने कहा कि 187 संशोधन पेश किए गए थे लेकिन केवल तीन बड़े संशोधनों पर ही फैसला किया जाना था। ये क्रमश: लोकायुक्त के गठन के लिए राज्यों को अधिकार देने, उसकी नियुक्ति और हटाने का अधिकार और जांच एजेंसी की स्वायत्ता के बारे में थे। सरकार को संशोधनों पर विचार के लिए ढाई माह का समय मिला और अब उसे बताना चाहिए कि उसने क्या सोचा है।
  
उन्होंने यह भी कहा कि व्यवधान डालने वाले सदस्यों को वीटो का अधिकार नहीं होना चाहिए। जदयू के शिवानंद तिवारी ने जानना चाहा कि सरकार ने संशोधनों को स्वीकार किया या खारिज कर दिया।
  
जेटली से सहमति जताते हुए डी राजा ने कहा कि देश जानना चाहता है कि आखिर लोकपाल विधेयक का क्या हुआ। बसपा के एस पी सिंह बघेल ने कहा कि लोग जानना चाहते हैं कि लोकपाल विधेयक को कब और किस रूप में लाया जाएगा। असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने उम्मीद जताई कि लोकपाल विधेयक पर जल्द ही चर्चा होगी।

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