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कृषि में 2.5 प्रतिशत विकास दर का अनुमान

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने गुरुवार को संसद में 2011-12 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। सर्वेक्षण के मुताबिक वर्ष 2011-12 में कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में 2.5 प्रतिशत की विकास दर रहने का अनुमान लगाया गया।

हालांकि सर्वेक्षण में रिकार्ड खाद्य उत्पादन के बावजूद योजनान्वित लक्ष्यों से कम विकास दर के मामले पर चिंता भी व्यक्त की गई। वर्तमान पंचवर्षीय योजना के दौरान इसके चार प्रतिशत की तुलना में 3.28 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया।

कृषि क्षेत्र में हुए उच्च उत्पादन से केन्द्रीय भंडारों में खाद्यानों की स्थिति में वृद्धि दर्ज की गई। एक फरवरी, 2012 को 3.18 करोड़ टन चावल और 2.34 करोड़ टन गेहूं के साथ कुल खाद्यान भंडार 5.52 करोड़ टन था। वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लक्षित जरूरतों को पूरा करने के लिए यह पर्याप्त है। समीक्षा में कहा गया कि 2011-12 के दौरान खाद्यानों का उत्पादन 25.04 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

खाद्यानों की खेती के क्षेत्र में कमी आने पर चिंता जताते हुए सर्वेक्षण में अनुसंधान और विकास में पर्याप्त निवेश के माध्यम से इस क्षेत्र में तेजी से सुधार लाने की जरूरत बताई गई। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि कृषि क्षेत्र में भंडारण, संचार, सड़क और बाजार जैसी बुनियादी संरचनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सर्वेक्षण के मुताबिक अगले वित्त वर्ष के परिणाम भी बेहतर रहने की सम्भावना है, लेकिन खाद्य की तेजी से बढ़ते मांग स्तरों को पूरा करने के लिए किसी नीति विकल्प पर विचार करने की जरूरत है। इन विकल्पों में कृषि से संबंधित आवश्यक वस्तुओं के एक निश्चति सीमा तक नियिमत आयात और गुणवत्ता पर घरेलू उत्पादन और खपत जरूरतों के मुताबिक वार्षिक रूप से निर्णय किया जाना चाहिए।

मंडी प्रशासन में सुधार और राज्यों के बीच व्यापार में लेवी में कमी के साथ-साथ मल्टीब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के माध्यम से कृषि, बुनियादी सुविधाओं में सुधार जैसे उपायों से देश में कृषि से सम्बंधित वस्तु प्रबंधन में सुधार में मदद मिलेगी।

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