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सीबीआई ने कोर्ट से कहा, बाबूगिरी से आजादी चाहिए

सीबीआई ने कोर्ट से कहा, बाबूगिरी से आजादी चाहिए

स्वायत्तता के रास्ते में केन्द्र सरकार की अड़ंगेबाजी के बीच केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि जांच एजेन्सी को सरकार की नौकरशाही के चंगुल से आजादी दिलाने की जरूरत है।

जांच एजेन्सी ने शीर्ष अदालत से कहा कि उसके कामकाजी स्वायत्तता हासिल करने के रास्ते में अभी भी कई बाधायें हैं क्योंकि केन्द्र सरकार उसके ब्यूरो को पदेन सचिव के अधिकार देने के पक्ष में नहीं है जिससे जांच एजेन्सी के कामकाज की आजादी सुनिश्चित होगी।

न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष जांच एजेन्सी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र शरण ने कहा कि हमें बाबूगिरी से आजादी चाहिए। उन्होंने जांच ब्यूरो के प्रशासनिक कामकाज में हर कदम पर आने वाली बाधाओं की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया।

न्यायाधीशों ने जब यह जानना चाहा कि वह नौकरशाही के इतना अधिक खिलाफ क्यों है तो उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है कि हम जो कुछ भी चाहते हैं वह लौट आता है और प्रत्येक प्रस्ताव बड़े बाबू के जरिये ही जाता है। शीर्ष अदालत जांच एजेन्सी के इस प्रस्ताव से सहमत थी कि उसके निदेशक को पदेन सचिव के अधिकार मिलने चाहिए ताकि वह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के माध्यम से जाने की बजाय सीधे मंत्री को रिपोर्ट करें।

न्यायालय ने इस बारे में अटार्नी जनरल गुलाम वाहनवती से स्पष्ट बयान मांगा तो वाहनवती ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकारी से निर्देश लेने के बाद ही वक्तव्य दे सकेंगे। दूसरी ओर जांच ब्यूरो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेन्द्र शरण ने कहा कि इस बारे में जांच एजेन्सी के प्रस्ताव से या फिर निदेशक को विशेष अधिवक्ता नियुक्त करने का अधिकार देने पर केन्द्र सहमत नहीं हैं। शरण ने कहा कि अन्य पुलिस बलों में महानिदेशक को सरकार के पदेन सचिव के अधिकार प्राप्त है।

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