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जगन के खिलाफ आरोपों की जांच कर रही सीबीआई

अपने आधिकारिक पद के कथित दुरुपयोग करने पर वाईएस जगनमोहन रेड्डी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने के बाद सीबीआई ने विभिन्न देशों को अनुरोध पत्र भेजकर आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र द्वारा धन के कथित हस्तांतरण की जांच में सहयोग मांगा है। हालांकि उनकी पार्टी ने इस आरोप से इंकार किया है।

राजनयिक चैनल के जरिए भेजे गए अनुरोध पत्र में आरोप लगाया गया है कि 2004 से 2009 के बीच जब वाई एस राजशेखर रेड्डी मुख्यमंत्री थे, उनके पुत्र जगन और उनके परिवार ने लाइसेंस और मंजूरी जारी कराने से संबंधित मामले में राज्य सरकार से कई बार तरफदारी प्राप्त करते हुए सरकारी खजाने के साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी की।

पत्र में जगन और उनके परिवार पर यह आरोप भी लगाया गया है कि कंपनियों को खनन लीज और विशेष आर्थिक क्षेत्र के लिए भूमि के आवंटन से जुड़े मामले में भी तरफदारी हासिल की गई। इन कंपनियों ने छोटे रेड्डी द्वारा शुरू की गई कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया।

इन आरोपों से इंकार करते हुए रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने एक बयान में कहा कि जगन मोहन रेड्डी की कंपनियों में सभी निवेश बेहतर वाणिज्य के लिए है और इसमें हमेशा देश के कानून का अनुसरण किया गया है। जिन कंपनियों ने रेड्डी की कंपनियों में निवेश किया है, उन्होंने देश की अन्य ब्लूचिप कंपनियों में भी निवेश किया है।

पार्टी ने एक बयान में कहा कि जगन मोहन रेड्डी द्वारा कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। अत: इस संबंध में आशंका प्रकट करने के लिए कुछ नहीं है। हम आश्वस्त हैं कि वह अंतत: पाक साफ निकलेंगे। पार्टी ने आरोप लगाया कि सीबीआई कडप्पा के सांसद को किसी न किसी मामले में फंसाने के एजेंडा पर काम कर रही है।

हैदराबाद में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के हस्ताक्षर के तहत भेजे गए अनुरोध पत्र में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड से उस देश में निगमित एक कंपनी के बैंक खाते का ब्यौरा और उसके मालिकों तथा अधिकत हस्ताक्षरकर्ताओं की जानकारी के संबंध में अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही यह जांच करने को भी कहा गया है कि क्या मारीशस में स्थित कंपनियों ने वहां के जरिए भारत में निवेश किया है।

इसमें कंपनी के शेयरधारकों की वास्तविकता और उनके वाईएस राजशेखर रेड्डी या जगन मोहन रेड्डी से उनके संबंधों के बारे में जांच करने का भी अनुरोध किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के बीच परस्पर कानूनी सहायता संबंधी कोई संधि नहीं है। अनुरोध पत्र लक्जमबर्ग, सिंगापुर, हांगकांग, मारीशस और ब्रिटेन को भी भेजे गए हैं।

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