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पृथक राज्य के लिए बुंदेलखण्डी ही नहीं सहमत

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पृथक बुंदेलखण्ड राज्य का मुद्दा कितना कारगर रहा, यह चुनाव के नतीजों से उजागर हो गया। बुंदेली मतदाताओं ने अलग राज्य की मांग करने वाले अगुवा नेताओं को बुरी तरह से नकार दिया। एक फीसदी से भी कम बुंदेली मतदाताओं ने पृथक बुंदेलखण्ड राज्य का समर्थन किया है। पृथक राज्य की मांग को लेकर आगे रहे फिल्म अभिनेता राजा बुंदेला को सिर्फ 1897 मत ही मिल पाए.., मतलब साफ है।

फिल्म अभिनेता और बुंदेलखण्ड कांग्रेस के संस्थापक अध्यक्ष राजा बुंदेला एक लम्बे अरसे से बुंदेलखण्ड को एक पृथक राज्य बनाने के मसले पर यहां की पगडंडियों की खाक छानते रहे। इसी मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ बुंदेलखण्ड कांग्रेस का गठन किया और चुनाव भी लड़ा लेकिन विधानसभा चुनाव में उनका प्रयास बेमतलब साबित हुआ। राजा बुंदेला ने खुद के अलावा अपने नवोदित दल से 11 अन्य उम्मीदवारों को भी चुनावी समर में उतारा, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

पृथक राज्य को चुनावी मुद्दा बनाने वाले इस दल के 12 उम्मीदवारों को कुल 24 हजार 78 मत ही मिले, जो एक फीसदी से भी कम हैं। चुनाव के ऐन वक्त पर मायावती सरकार द्वारा विधानसभा में प्रदेश को चार राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद लग रहा था कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ही नहीं, बल्कि अन्य स्थानीय दल व संगठन भी इसे मुद्दा बनाएंगे और बुंदेली मतदाताओं पर इसका असर भी होगा। लेकिन, जहां बसपा ने खुद इसे पीछे धकेल दिया, वहीं एकीकृत पार्टी, बुंदेलखण्ड नवनिर्माण सेना व बुंदेली सेना जैसे संगठन चुनाव लड़ने से ही कतरा गए।

केवल राजा बुंदेला अपने 11 उम्मीदवारों के साथ चुनाव लड़े और अप्रत्याशित रूप से पराजित भी हुए। राजा बुंदेला को झांसी नगर सीट से सिर्फ 1897 मत मिले, जबकि उनकी पार्टी से चुनाव लड़ रहे देवराज गुप्ता (बांदा) को 566, अतुल कुमार (बबेरू) को 1,364, महेन्द्र प्रताप (तिंदवारी) को 387, डीके सिंह (महोबा) को 772, स्वर्णिमा सिंह (राठ) को 768, किशोरीलाल (उरई) को 1,426, मोहनदास (माधौगढ़) को 1,005, अमर सिंह (कालपी) को 1,132, जगपत सिंह (गरौठा) को 388, मुक्ता सोनी (ललितपुर) को 10,766 एवं बृजेश कुमार (महरौनी) को 3,657 मत ही मिल पाए।

बुंदेला को नरैनी, चित्रकूट, मानिकपुर, चरखारी, हमीरपुर, बबीना एवं मऊरानीपुर सीट से कोई उम्मीदवार ढूंढे नहीं मिला। इस प्रकार कुल एक फीसदी से भी कम बुंदेली मतदाता विधानसभा चुनाव में पृथक राज्य का समर्थन करते नजर आए।

राजा बुंदेला का कहना कि इस चुनाव में बुंदेली सत्तारूढ़ दल बसपा से बेहद खफा थे, इसलिए विकल्प के तौर पर सपा व कांग्रेस के पक्ष में रुझान ज्यादा हुआ है। वह कहते हैं कि फिर भी वह हताश नहीं हैं, पृथक राज्य के मसले पर जनजागरण जारी रहेगा।

कल भले ही बुंदेली पृथक राज्य की मांग को लेकर आंदोलन करें, पर इस चुनाव के नतीजों से साबित है कि यहां के मतदाता पृथक बुंदेलखण्ड राज्य के लिए अभी सहमत नहीं हैं।

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  • Web Title:पृथक राज्य के लिए बुंदेलखण्डी ही नहीं है तैयार