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उद्योग जगत ने बजट को महंगाई बढ़ाने वाला बताया

उद्योग जगत ने वित्त वर्ष 2012-13 के बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा है कि इससे महंगाई बढ़ेगी और उपभोक्ता मांग प्रभावित होगी। उद्योग जगत ने कहा है कि वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बजट में अधिक कर जुटाने का प्रयास किया है और एक अवसर गंवा दिया है।

फिक्की के अध्यक्ष आर वी कनोड़िया ने कहा कि इस बजट से अर्थव्यवस्था की रफ्तार नहीं बढ़ने वाली। वहीं सीआईआई के अध्यक्ष बी मुत्तुरमन ने कहा कि वह और अधिक की उम्मीद कर रहे थे और उत्पाद शुल्क आधारित प्रस्तावों से दाम और चढ़ेंगे। मुत्तुरमन ने कहा कि राजकोषीय घाटे को कम करने के कदम से अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।

सी के बिड़ला समूह के सिद्धार्थ बिड़ला ने कहा कि इस बजट ने मौका गंवा दिया। बायोकॉन की चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार शॉ ने आशंका जताई कि बजट मुद्रास्फीतिक दबाव बढ़ाने वाला साबित होगा।

जे के समूह के हर्षपति सिंघानिया ने इसी तरह की राय जाहिर करते हुए कहा कि उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ेगी। नकदी की कमी से जूझ रही सरकार ने 2012-13 में 45,940 करोड़ रुपये का अतिरिक्त अप्रत्यक्ष कर जुटाने का प्रस्ताव किया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय किया गया है जब उद्योग जगत पहले से मांग की कमी से जूझ रहा है।

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