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ब्रिक देश बने रहेंगे आर्थिक विकास का इंजन

ब्राजील की अर्थव्यवस्था में ठहराव, रूस में गहराती राजनीतिक अनिश्चितता, भारत में रिकार्ड गिरावट पर पहुंचा रुपया और चीन में आर्थिक सुस्ती के बावजूद इन देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का इंजन बनने की हिम्मत नहीं खोई है।
 
आर्थिक विशेषज्ञों की राय में वर्ष 2012 की शुरुआत इन ब्रिक देशों के लिए बडी चुनौतियां लेकर आएगी लेकिन फिर भी आर्थिक प्रगति की राह पर बढने का इनका माद्दा कम नही होगा। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के प्रमुख आर्थिक विशेषज्ञ गेरार्ड लियोन्स का कहना है कि चीन समेत ब्रिक समूह के सभी विकासशील देश अगले वर्ष के मध्य तक एक बार फिर वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में तेजी का कारण बनेंगे।
 
इन विशेष ने इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की उस रिपोर्ट का हवाला दिया है जिसके मुताबिक वर्ष 2009 में वैश्विक आर्थिक संकट के चरम पर रहने के दौरान जहां विकसित देशों की विकास दर 3.7 प्रतिशत सिकुडी वहीं ब्रिक जैसे विकासशील देशों में इसकी रफ्तार महज 2.8 फीसदी कम हुई। जबकि वर्ष 2008 में यह 6 फीसदी थी।
 
आर्थिक जानकारों के मुताबिक विकास का पहिया विकोसशील देशों में तेजी से घूमता दिख रहा है। इसका ताजा उदाहरण यह है कि ऐसे समय जबकि साख निर्धारक संस्था स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने अमेरिका समेत यूरो क्षेत्र के कई प्रमुख देशों की ऋण साख घटा दी है वहीं एक अन्य रेटिंग एजेंसी फिच ने इंडोनेशिया की सरकारी ऋण साख को एक स्तर और बढा दिया है।
 
अमेरिकी निवेशक बैंक मेरिल लिंच के मुताबिक निवेशकों के लिए अगले साल उन देशों में निवेश सुरक्षित होगा जहां कि अर्थव्यवस्थाएं निर्यात की बजाए घरेलू मांग पर ज्यादा टिकी हुई हैं ऐसी स्थिति में ब्रिक देश निवेश के लिहाज से उत्तम होंगे।

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