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अंतिम मौके के बावजूद विजेंदर नर्वस नहीं

विजेंदर सिंह के पास एशियाई ओलंपिक क्वालीफायर के जरिए लंदन खेलों के लिए क्वालीफाई करने का अंतिम मौका है लेकिन यह स्टार मुक्केबाज इस चुनौती से डरा नहीं है क्योंकि वह पहले भी इस तरह के हालात का सामना कर चुका है।

कजाखस्तान के अस्ताना में चार अप्रैल से शुरू हो रहे क्वालीफायर्स के लिए भारतीय टीम के रवाना होने से एक दिन पूर्व ओलंपिक और विश्व चैम्पियनशिप के कांस्य पदक विजेता विजेंदर ने कहा कि बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद से मैं हमेशा दबाव में रहा हूं। यह मेरे लिए नयी चीज नहीं है। किसी भी टूर्नामेंट के लिए रवाना होने से पहले दबाव रहता है।

उन्होंने कहा कि जब मैंने 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता था तब भी मुझ पर दबाव था। मैंने इसके बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता लेकिन इससे भी दबाव कम नहीं हुआ। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि इससे निपटने के लिए मैं बीजिंग के बाद से मानसिक तौर पर अधिक तैयार हो गया हूं।

अजरबैजान में पिछले साल पहले ओलंपिक क्वालीफायर विश्व चैम्पियनशिप में विजेंदर पहले ही दौर में हार गए थे लेकिन मुश्किल हालात में घिरा होना उनके लिए आसान नहीं है।

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