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बिहार में 29 वर्ष बाद छात्र संघ चुनाव के आसार

बिहार सरकार के चुनाव कराने का निर्देश देने के बाद राज्य के विश्वविद्यालयों में एक बार फिर छात्र संघ चुनाव होने की उम्मीद जगी है। राज्य के विश्वविद्यालयों में 1984 के बाद से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ है। जबकि छात्र संघ चुनाव कराने के लिए छात्र संगठन बराबर आंदोलन करते हैं। वैसे छात्र संगठनों को अब भी भरोसा नहीं है कि ये चुनाव जल्द होंगे।

बिहार के शिक्षा मंत्री पी.के. शाही ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र भेजकर चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

बिहार में अंतिम छात्र संघ चुनाव 1984 में पटना विश्वविद्यालय में हुआ था। इससे पूर्व 1980 में मगध विश्वविद्यालय के छात्र संघ का चुनाव हुआ था। राज्य के विश्वविद्यालयों के छात्र संघों के चुनाव 1984 के बाद से विभिन्न कारणों के चलते अब तक बंद हैं।

बिहार के प्रसिद्घ पटना विश्वविद्यालय के छात्र नेताओं ने देश एवं प्रदेश की राजनीति में अपनी छाप छोड़ी है। जेपी आंदोलन के कर्णधार रहे तत्कालीन छात्र नेता वर्तमान राजनीति में प्रमुख व्यक्तित्व हैं।

वर्ष 1973 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे, तो महासचिव वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी थे। पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के 1977 में हुए चुनावों में राज्य के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अंतिम चुनाव में शंभू शर्मा अध्यक्ष एवं रणवीर नंदन महासचिव निर्वाचित हुए थे।

छात्र नेताओं का मानना था कि राज्य के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव नहीं कराकर बिहार में राजनीतिक नेतृत्व समाप्त करने की चेष्टा की जा रही है।

गौरतलब है कि पटना कॉलेज के 150 वें स्थापना दिवस के मौके पर नौ जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी स्पष्ट कहा था कि राजनीति को प्रोत्साहित करने के लिए छात्र संघों के चुनाव कराने की आवश्यकता है। तब ही से यह माना जाने लगा था कि अब छात्र संघ के चुनाव जल्द होंगे।

ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के अध्यक्ष अभ्युदय राज्य सरकार की इस पहल से जरा भी उत्साहित नहीं हैं। वह कहते हैं, ''इससे पूर्व भी सरकार ने छात्र संघ चुनाव कराने की बात कही थी परंतु इसका नतीजा आज तक कुछ नहीं निकला। अब शिक्षा मंत्री द्वारा इसके लिए विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा गया है। सरकार अब यह कहकर पल्ला झाड़ेगी की उसने विश्वविद्यालयों को चुनाव कराने के लिए पत्र लिख दिया है।'' उन्होंने कहा कि वे लोग लिंगदोह समिति की अनुशंसा के आधार पर चुनाव कराने का विरोध करेंगे।

ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के विश्वजीत का मानना है कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए छात्र संघ का चुनाव आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि इन चुनावों से विश्वविद्यालय परिसर के शैक्षणिक माहौल सुधारने में मदद मिलती है। वह प्रश्न करते हैं, ''आज छात्रों की समस्याओं को देखने वाला कौन है? विश्वविद्यालय अपने मन से नियम बनाता है और उसमें छात्रों के हितों का ध्यान नहीं दिया जाता है।'' गौरतलब है कि बिहार में कुल 15 विश्वविद्यालय हैं।

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