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BCCI को RTI के अधीन लाना आवश्यक: सरकार

सरकार ने कहा है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत लाने के लिये उसके पास तार्किक और पर्याप्त कारण हैं।
     
केंद्रीय सूचना आयोग को दिये सात पन्नों के लिखित बयान में खेल मंत्रालय ने कहा कि बीसीसीआई को सरकार से भले ही सीधे आर्थिक सहायता नहीं मिलती हो लेकिन आयकर, कस्टम शुल्क में छूट, स्टेडियमों के लिये रियायती दरों पर भूमि के रूप में उसे परोक्ष सहायता मिलती ही है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि बीसीसीआई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिये राष्ट्रीय टीम का चयन करके सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वाह कर रहा है।
     
प्रतीक चिन्ह और नाम (अनुचित प्रयोग से बचाव) अधिनियम का हवाला देते हुए मंत्रालय ने चेताया कि भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड नाम से बोध होता है कि इसे सरकार से प्रश्रय हासिल है और यदि बीसीसीआई निजी ईकाई के रूप में काम करना चाहती है तो उसे नाम से भारत शब्द हटाना होगा।
     
मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार के पास बीसीसीआई को सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने के पर्याप्त कारण हैं। सूचना आयुक्त एम एल शर्मा ने आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल और आलोक वाष्र्णेय की दलीलें सुनने के बाद खेल मंत्रालय को इस बारे में लिखित बयान देने के लिये कहा था कि बीसीसीआई को आरटीआई के तहत लाया जा सकता है या नहीं।
    
आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत गैर सरकारी संगठन भी इसके दायरे में आ सकते हैं यदि प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उन्हें सरकार से वित्तीय सहायता मिल रही है। मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार बीसीसीआई को प्रत्यक्ष सहायता नहीं दे रही और ना ही उसे इस बारे में जानकारी है कि राज्य सरकारों से उसकी प्रदेश ईकाइयों को सहायता मिलती है या नहीं।
    
परोक्ष वित्तीय सहायता के बारे में मंत्रालय ने कहा कि बीसीसीआई कस्टम डयूटी, आयकर और अन्य छूट सरकार से लेती है। इसके अलावा राज्य सरकारों ने इसे रियायती दरों पर भूमि आवंटित की है।
    
मंत्रालय ने कहा कि बीसीसीआई को सरकार से परोक्ष वित्तीय सहायता मिल रही है। किसी आयोजन के समय सारी सुरक्षा और नागरिक सुविधायें केंद्र या राज्य सरकार द्वारा मुहैया कराई जाती है। कुछ रकम भले ही आयोजकों से ली जाती हो लेकिन सुरक्षा, वीजा मंजूरी वगैरह पर अघोषित खर्च सरकार को ही वहन करना पड़ता है। बयान में सरकार ने कहा कि उसने सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को खेल विकास विधेयक के तहत आरटीआई के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

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