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बचाव कार्य जारी, बद्रीनाथ से 200 लोगों को बचाया गया

बाढ़ प्रभावित उत्तराखंड में खराब मौसम के कारण बद्रीनाथ में बचाव कार्य में शनिवार को शुरुआत में बाधा उत्पन्न हुई लेकिन बाद में मौसम साफ हो जाने के बाद उसे शुरू कर दिया गया और अब तक 200 लोगों को वहां से बचाया जा चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि अभियान अपने अंतिम चरण पर है और अब अधिक ध्यान बद्रीनाथ में फंसे करीब 1400 लोगों को बाहर निकालने पर दिया जा रहा है। यदि मौसम ने साथ दिया तो अभियान के शाम तक पूरा हो जाने की उम्मीद है। हेलीकॉप्टरों ने तीर्थयात्रियों को इलाके से बाहर निकालने के लिए उड़ानें भरनी शुरू कर दी हैं।

रद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जि़लों के 600 से अधिक गांवों में आवश्यक राहत सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। ये गांव बाढ के बाद अन्य हिस्सों से कट गए हैं। इन गांवों में अब तक 2379 टन गेहूं और 2875 टन चावल भेजा जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि राहत सामग्री केवल हवाई मार्ग से पहुंचाई जा सकती है लेकिन मौसम में लगातार बदलाव होने से इस कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि बाढ़ प्रभावित गांवो में अनाज, मिट्टी का तेल और एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

उत्तराखंड में बाढ़ से सड़क नेटवर्क बुरी तरह नष्ट हो गया है। टिहरी में 259 सड़कें, देहरादून में 139 सड़कें, उत्तरकाशी में 132 सड़कें, चमोली में 110 सड़कें और रद्रप्रयाग जि़ले में 71 सड़कें टूट गई हैं। इस बीच भागीरथी नदी में जलस्तर बढने के बाद नदी किनारे रह रहे 200 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया। मौसम विभाग ने हालांकि कहा है कि जलस्तर बढ़ने का कारण बर्फ पिघलना है और इससे बाढ़ का कोई खतरा नहीं है।

उत्तराखंड के मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक आनंद शर्मा ने कहा कि सूरज की गर्मी से पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों में जमी बर्फ पिघल रही है और इसी से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि बाढ़ आने की स्थिति पैदा नहीं होगी। शर्मा ने कहा कि हल्की बारिश होने की संभावना है लेकिन तेज़ बारिश नहीं होगी।

इससे पहले केदारनाथ और गुप्तकाशी में रुक-रुक कर होने वाली बारिश के कारण मलबा हटाने और उसके नीचे दबे शवों को बाहर निकालने के प्रयासों में रुकावट पैदा हुई। बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित केदारनाथ इलाके में महामारी फैलने का खतरा कम करने के लिए शवों के अंतिम संस्कार का कार्य जारी है।
 
अब तक 34 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है और मलबे से निकाले गए 12 और शवों का अंतिम संस्कार भी जल्द ही किया जाएगा।
 अधिकारियों ने बताया कि महामारी फैलने के खतरे के मद्देनज़र चिकित्सकों के दल प्रभावित जि़लों में भेजे गए हैं। खतरे से पूरी तरह टल जाने तक वे प्रभावित इलाकों में ही रहेंगे।

इस बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के विशेषज्ञों का एक दल बाढ़ के प्रकोप से केदारनाथ मंदिर को हुए नुकसान का जायज़ा लेने और इसे फिर से पहले जैसा रूप देने के लिए जरूरी चीजों का अध्ययन करने के मकसद से इस पवित्र धाम का दौरा करेगा। इस दल में देहरादून और दिल्ली के पांच विशेषज्ञ होंगे।


आपदा के 14 दिनों बाद भी मरने वालों की संख्या बताने से इंकार करते हुए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि यह संख्या एक हजार से ज्यादा हो सकती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक मलबे को हटाने के बाद ही मरने वाले लोगों की संख्या का पता चल सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्पष्ट तस्वीर कुछ दिनों में सामने आएगी क्योंकि लापता लोगों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। लापता लोगों की संख्या करीब 3000 बताई जाती है। बाढ़ के कारण उत्तराखंड में सड़क संपर्क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। टिहरी में 259, देहरादून में 139, उत्तरकाशी में 132, चमोली में 110 और रूद्रप्रयाग जिले में 71 सड़के टूट चुकी हैं। भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी किनारे रहने वाले करीब 200 से ज्यादा परिवार को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए कहा गया है। बहरहाल, मौसम विज्ञान विभाग ने लोगों की आशंका को खारिज करने का प्रयास किया और कहा कि ग्लेशियरों के पिघलने के कारण जलस्तर बढ़ा है और बाढ़ का खतरा नहीं है।

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  • Web Title:बचाव कार्य जारी, बद्रीनाथ से 200 लोगों को बचाया गया