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कम नींद का बुरा असर कर्मचारियों के प्रदर्शन पर

उद्योग संगठन एसोचैम के एक सर्वेक्षण के अनुसार, लंबे समय तक काम तथा अधिक तनाव से कर्मचारियों की नींद गायब हो सकती है और इसका असर अंतत: दफ्तर में उनके काम पर ही पड़ेगा।

एसोचैम ने दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में आईटी, आईटीईएस, दूरसंचार, ऊर्जा तथा टिकाऊ उपभोक्ता सामान जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर सर्वेक्षण के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस (सात अप्रैल) के मद्देनजर किए गए इस सर्वेक्षण के अनुसार, 78 प्रतिशत कारपोरेट कर्मचारी मानते हैं कि वे हर दिन छह घंटे से कम सोते हैं और इसका परिणाम थकावट व विषाद के रूप में सामने आता है।

एसोचैम के महासचिव डी एस रावत का कहना है कि कम सोने के व्यापक असर होते हैं, जिनमें दिन में विषाद, शारीरिक परेशानी, तनाव, प्रदर्शन में कमी तथा मानसिक रूप से कार्यस्थल पर नहीं होना शामिल है। मंडल ने हालांकि यह नहीं बताया है कि यह सर्वेक्षण कितने लोगों पर किया गया।

अनिद्रा के सबसे अधिक मामलों के लिहाज से दिल्ली पहले नंबर पर है। इसके बाद मुंबई, अहमदाबाद, चंडीगढ़, पुणे और चेन्नई का नंबर आता है। इसके अलावा सर्वेक्षण में कहा गया है कि लगभग आधे लोग मोटापे से परेशान हैं।

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