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पोतों को फिल्मों से दूर रखती हैं आशा

गायिका आशा भोसले आजकल की फिल्मों की सामग्री बिल्कुल पसंद नहीं करती। यही कारण है कि वह अपने पोते-पोतियों को इन फिल्मों से दूर रखती हैं।

भोसले ने बताया कि हिन्दी फिल्में बढ़ रही हैं। कुछ अच्छी, छोटी फिल्में बनाई जा रही हैं। लेकिन कुछ फिल्में बहुत गंदगी हैं, उनमें गालियां और अनुचित सम्वाद हैं।

78 वर्षीया गायिका ने कहा कि यह नई पीढ़ी के लिए अच्छा नहीं है। मैं इस तरह की फिल्में अपने पोतों को नहीं दिखाती क्योंकि तब वे भी इसी तरह बात करना शुरू कर देंगे।

हालांकि आशा फिल्म 'माई' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत के लिए बिल्कुल तैयार हैं। यह एक ऐसी महिला की सम्वेनशील कहानी है, जिसे अपना ही बेटा छोड़ देता है और वह किस तरह अपनी बेटी और दामाद के घर आसरा लेती है।

इसी बीच, अनुभवी गायिका की आवाज का इस्तेमाल वहीदा रहमान, वैजंतीमाला, साधना, शर्मिला टैगोर से लेकर रेखा, उर्मिला मातोंडकर और एश्वर्या राय तक के लिए किया गया है। उनका कहना है कि वह बहुत सौभग्यशाली है कि उन्हें बीते 65 वर्षों से दर्शकों का प्यार मिल रहा है।

उल्लेखनीय है कि 18 भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गा चुकी आशा ने वर्ष 1956 में फिल्म 'सीआईडी' से पहली बार बॉलीवुड के लिए अपनी आवाज दी थी। इसके अलावा उन्होंने काफी सारी निजी एलबमों और अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों के साथ मिलकर गायिकी की।

वर्ष 2006 में आशा भोसले ने पाकिस्तानी फिल्म 'मैं एक दिन लौट के आउंगा' के लिए भी गीत रिकॉर्ड किया था।

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