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रंगमंच के कलाकारों को मिल रही हैं मजबूत भूमिकाएं

अब वे दिन गए जब फिल्मों में रंगमंच के कलाकारों की अभिनय की मजबूत पृष्ठभूमि के बाद भी उन्हें बॉलीवुड में छोटी-मोटी भूमिकाएं ही मिल पाती थीं। समय बदलने के साथ नसीरुद्दीन शाह, अनुपम खेर, इरफान व ओम पुरी जैसे सितारों को बॉलीवुड में महत्वपूर्ण किरदार मिलने लगे हैं।

अभिनेता अनुपम खेर इसे स्वागत योग्य बदलाव बताते हैं। उन्होंने हाल ही में प्रमोद जोशी की 'छोड़ो कल की बातें' में एक दृष्टिहीन व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से स्नातक अनुपम ने एक खास बातचीत में कहा कि यह देखकर अच्छा लग रहा है कि अब अंतत: थियेटर के कलाकारों को स्वीकृति मिलने लगी है। ऐसा इसलिए है कि आजकल के फिल्मकार अर्थपूर्ण सिनेमा बनाने की दिशा में सोच रहे हैं और वे ऐसे अभिनेता चाहते हैं जो किरदार को प्रामाणिक बना सकें।

अनुपम 'एक्टर प्रीपेयर्स' नाम से एक अभिनय स्कूल भी चलाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें दृष्टिहीन व्यक्ति का किरदार निभाने में अपने रंगमंच के अनुभव से काफी मदद मिली। अनुपम ने 'सारांश', 'मैंने गांधी को नहीं मारा', 'खोसला का घोसला' और 'ए वेडनेस्डे' जैसी फिल्मों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

एनएसडी के एक और पूर्व छात्र इरफान भी अभिनय की दुनिया में कमाल कर रहे हैं। उनके अभिनय वाली हाल ही में प्रदर्शित हुई फिल्म 'पान सिंह तोमर' कम बजट की फिल्म थी लेकिन फिर भी उसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा व्यवसाय किया।

निर्देशक तिग्मांशु धूलिया के लिए 'पान सिंह तोमर' में इरफान को लेना स्वाभाविक था। धूलिया कहते हैं कि इरफान ने वास्तव में बहुत मेहनत की और मैंने इसीलिए उनका चुनाव किया था। इस भूमिका के साथ सिर्फ उनके जैसा अभिनेता ही न्याय कर सकता था।

बमन ईरानी, मोहन अगाशे, मनोज बाजपेयी, विक्रम गोखले, किरण खेर और लिलेट दूबे कुछ और ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने रंगमंच की दुनिया से ही फिल्मों में कदम रखा है।

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