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अमेरिकी विशेषज्ञ ने की लश्कर के खात्मे की वकालत

एक अमेरिकी विशेषज्ञ ने पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को दक्षिण एशिया में अलकायदा के बाद सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन करार देते हुए इसके समूल खात्मे की वकालत की है।

वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक, केरनेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में दक्षिण एशियाई कार्यक्रम के सीनियर एसोसिएट,  जे. टेलिस ने लिखा है कि यद्यपि भारत और कश्मीर अभी तक लश्कर के वरीयता वाले इलाके रहे हैं, परंतु इस संगठन की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक अस्थायी उपस्थिति रही है।

टेलिस ने लिखा है कि यद्यपि पाकिस्तान से भारत की निकटता के कारण नई दिल्ली को लश्कर का सर्वाधिक शिकार होना पड़ा है, लेकिन मुम्बई हमला इस बात को जाहिर करता है कि भारत जिस आतंकवाद का सामना कर रहा है, वह केवल नई दिल्ली की अकेली समस्या नहीं है।

टेलिस ने चेतावनी दी है कि लश्कर का हमला अमेरिकी धरती तक भी पहुंच सकता है। टेलिस अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, और एशियाई रणनीतिक मुद्दों पर विशेषज्ञता रखते हैं और वह भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते से सम्बंधित बातचीत में निकटता से जुड़े हुए हैं।

टेलिस ने लिखा है कि अमेरिका के लिए यही उचित होगा कि वह लश्कर और अन्य खतरनाक दक्षिण एशियाई आतंकवादी संगठनों को सम्भव हो तो पाकिस्तान की मदद से, अन्यथा उसकी मदद के बगैर ही जड़ से समाप्त करे।

यद्यपि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने नवम्बर 2008 में हुए मुम्बई हमले के बाद पहली बार लश्कर को संज्ञान में लेना शुरू किया, लेकिन टेलिस ने कहा है कि यह संगठन 1987 में उस समय अस्तित्व में आया था, जब पाकिस्तान इस्लामिक उफान से जूझ रहा था।

टेलिस ने आगे कहा है कि उस समय लश्कर को कार्यकर्ताओं, धन तथा सबसे महत्वपूर्ण हर तरह की सरकारी मदद की नियमित आपूर्ति सुलभ थी। टेलिस ने कहा है कि यह स्पष्ट है कि अलकायदा के बाद लश्कर दक्षिण एशिया में संचालित सबसे खतरनाक आतंकवादी संगठन है। क्योंकि यह पाकिस्तान के प्रति वफादार है और यह घरेलू विरोधियों के खिलाफ अपने संरक्षक राज्य की हिफाजत करना चाहता है।

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