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अमेरिकी कारपोरेट ने भी नकारा भारतीय बजट को

अमेरिकी व भारतीय उद्योगों के एक संगठन ने केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश किए गए आम बजट को संयत, किंतु परिवर्तनकारी सुधारों से विहीन बताया है, और आशा जाहिर की है कि सरकार बजट सत्र के दौरान विदेशी निवेशकों के अनुकूल प्रमुख सुधारों पर गौर करेगी।

अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) ने कहा है, ''केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट में कई नीतिगत घोषणाएं, खासतौर से कराधान में, चिंताएं पैदा करती है।'' इस संगठन में लगभग 400 शीर्ष अमेरिकी कम्पनियां और कई भारतीय कम्पनियां शामिल हैं, जो भारत-अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक सम्बंधों के लिए काम करती हैं।

यूएसआईबीसी ने कहा है कि संगठन आशा करता है कि संसद का बजट सत्र ऐसे प्रमुख सुधारों का प्रस्ताव करेगा, जो विदेशी निवेशकों के लिए इस बात का संकेत होगा कि भारत सरकार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में मजबूत वृद्धि हासिल करने और वैश्विक व्यापार बढ़ाने के अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ है।

यूएसआईबीसी ने बजट में मौजूद कुछ सकारात्मक तत्वों पर गौर किया है, जिसमें नागरिक उड्डयन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एएफडीआई) और बाहरी वाणिज्यिक उधारी का उदारीकरण, कारपोरेट बांड्स में योग्य विदेशी निवेशकों को प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति, और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के समय में रक्षा खर्च में वृद्धि शामिल हैं।

यूएसआईबीसी के अध्यक्ष रॉन सोमर्स ने कहा है, ''रुग्ण वैश्विक आर्थिक सुधार को लेकर अनवरत बनी चिंताओं के कारण भारत का नीतिगत वातावरण अंतर्राष्ट्रीय निवेश के लिए आक्रामकरूप से प्रतिस्पर्धी होना चाहिए।''

सोमर्स ने कहा, ''विदेशी निवेशकों का भारत में भरोसा बढ़ाने के लिए एक पूर्वानुमेय व पारदर्शी कर वातावरण आवश्यक है।''

सोमर्स ने आगे कहा है, ''यूएसआईबीसी वोडाफोन के सम्बंध में आए सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का समर्थन करने और किसी प्रतिगामी नीतिगत बदलावों से बचने के लिए भारत सरकार को प्रोत्साहित करता है।''

उन्होंने कहा, ''2012-13 के बजट में नागरिक उड्डयन, अधोसंरचना, और पूंजी बाजार में प्रगतिशील सुधारों के लिए किया गया प्रस्ताव असंगत कर नीति द्वारा कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।''

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